पूर्व IAS गोपीनाथन पर FIR, शासन ने कहा – वो अफसर किस काम का जो आपदा में काम न आये

New Delhi : केंद्र शासित प्रदेश दमन दीव और दादरा नगर हवेली में पुलिस ने पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कन्नन गोपीनाथन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने पिछले साल IAS की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था और हाल में केंद्र सरकार ने उनसे कहा था कि वे नौकरी को दोबारा ज्वाइन करें। लेकिन कन्नन गोपीनाथन ने नौकरी ज्वाइन करने से मना कर दिया, यह कहते हुए कि वे समाज सेवा कर रहे हैं और अपने हिसाब से समाज सेवा करते हुए कोरोना आपदा के पीड़ितों और जरूरतमंदों की मदद करना चाहता हूं। उनके नौकरी ज्वाइन नहीं करने के बाद बहुत विवाद हुआ। अब पुलिस ने यह कहते हुये उनपर मामला दर्ज कर लिया है कि उन्होंने COVID – 19 महामारी के दौरान सरकार द्वारा निर्देशित कर्तव्यों के लिए मना कर दिया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि दमन पुलिस स्टेशन में महामारी रोग अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है।

पुलिस निरीक्षक लीलाधर मकवाना ने कहा कि गोपीनाथन, जिन्होंने पिछले अगस्त में आईएएस से इस्तीफा दे दिया था, को भी सरकारी आदेश का पालन करने में विफल रहने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत एक आरोप का सामना करना पड़ेगा। मकवाना ने कहा – पुलिस अधीक्षक एच.के. कांबले की शिकायत के आधार पर, गोपीनाथन के खिलाफ कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनजर अपना कर्तव्य फिर से शुरू नहीं करने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
गोपीनाथन ने पिछले साल दादरा और नगर हवेली के कलेक्टर के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने जम्मू और कश्मीर से 370 हटाये जाने के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। 9 अप्रैल 2020 को दमन दीव और नगर हवेली प्रशासन ने उनसे इस आधार पर ड्यूटी वापस लेने को कहा कि उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।
हालांकि, गोपीनाथन ने इनकार कर दिया। उन्होंने सरकार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया, और कहा कि वह लोगों को महामारी से निपटने में मदद करने के लिए स्वैच्छिक काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन एक IAS अधिकारी के रूप में कर्तव्य को फिर से शुरू नहीं करेंगे।

प्रशासन के नौकरी ज्वाइन करने के अनुरोध के बाद गोपीनाथन ने ट्वीट किया था – मुझे स्पष्ट करना है कि मैंने अगस्त 2019 में आठ महीने के करीब भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और सरकार ने तब से मेरे वेतन और इस्तीफ पर कार्रवाई नहीं की है। इसलिए, मैं जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हूं। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, मैं इस आपदा के दौरान दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के लोगों के लिए अपनी सभी सेवाओं का विस्तार करता हूं।

अगस्त में अपने पद से इस्तीफा देने के बाद, गोपीनाथन ने NPR,NRC और CAA के विरोध का बिगुल भी फूंका था। जनवरी में प्रयागराज में सरदार पटेल संस्थान में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से संबंधित एक घटना से पहले उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। पुलिस ने उन्हें प्रयागराज हवाई अड्डे से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी और इसके बजाय उन्हें दिल्ली जाने के लिए उड़ान भरने के लिए मजबूर किया। 4 जनवरी को, गोपीनाथन को आगरा में हिरासत में लिया गया था जब वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे। उन्हें उत्तर प्रदेश से बाहर निकाल दिया गया।

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