यही असल तस्वीर है हमारे भारत की : पेट भरना है तो गांव-घर जाना ही होगा

New Delhi : आज दिल्ली में देश की बेहद बदसूरत तस्वीर दिखी। पेट की भूख और आर्थिक मजबूरियों ने 50000 लोगों को एकसाथ दिल्ली की सड़कों पर उतार दिया। पूरे लॉकडाउन का माखौल उड़ा लेकिन वे लोग भी क्या करते। सभी बेरोजार हो गये हैं। खाने को पैसे नहीं हैं। जहां रह रहे हैं वहां भी हिराकत भरी नजर से देखे जाते है। उनके पास गांव लौट जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं। उन्हें पता है कि गांव जायेंगे तो कम से कम भूखे पेट तो नहीं सोयेंगे। सब ठीक हो जायेगा।

लॉकडाउन टूटने की शुरुआत शनिवार दोपहर को एनसीआर में आने वाले गाजियाबाद से हुई। रोजी और रोटी की चिंता की वजह से अपने घर लौटना चाह रहे लोगों की यूपी गेट बॉर्डर पर भीड़ लग गई। उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आई और उसने बसों का इंतजाम कर लोगों को रवाना करवाया।
रात 8 बजे तक दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार की कुल 400 बसों के जरिए लोगों को गाजियाबाद के यूपी गेट बॉर्डर और दिल्ली के आनंद विहार से रवाना किया जा चुका था। फिर भी आनंद विहार बस टर्मिनल पर हजारों की तादाद में लोग इंतजार करते रह गए। दो राज्यों की सरकारों के इंतजाम भी नाकाफी साबित हुए। पुलिस अपील करती रही कि एकदूसरे से दूरी बनाकर रखें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें, लेकिन यह अपील बेअसर नजर आई।


कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा – दिल्ली, गाजियाबाद, आनंद विहार की सड़कों पर एक मानव त्रासदी पैर पसार रही है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। वे पैदल, रिक्शे, गाड़ियों, बसों की छतों पर बैठकर अपने ठिकानों की तरफ भाग रहे हैं। समझ नहीं आता सरकार चाहती क्या है?

बहरहाल अलग-अलग जगहों से हजारों किलोमीटर पैदल चल लोगों के गांव पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। कई श्रमिक 3 दिन से पैदल चलकर शुक्रवार रात आगरा पहुंचे। इनमें से कुछ कानपुर के रहने वाले हैं। सभी श्रमिक आगरा पहुंचे। बताया कि पैदल घर जा रहे हैं, तकलीफ तो हो रही है, लेकिन रास्ते में खाने-पीने की व्यवस्था हो गई।
लॉकडाउन में अहमदाबाद से हजार किमी पैदल सफर कर तकरीबन 35 मजदूर पैदल झांसी पहुंचे। उन्हें बुंदेलखंड के अलग-अलग जनपदों तक पहुंचना है। वैसे लॉकडाउन का फायदा उठाने वालों के खिलाफ पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राशन और सब्जियों के निर्धारित मूल्य से अधिक कई गुना दामों पर बेचने वाले दुकानदारों पर केस दर्ज किए जा रहे हैं। ऐसे 18 मुनाफाखोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कालाबाजारी को रोकने के लिए पुलिस सिविल ड्रेस में ग्राहक बनकर राशन खरीदने जा रही है। ज्यादा कीमत पर खाद्य सामग्री बेचने वालों को दबोचा जा रहा है।


इन सबके बीच एक अच्छी खबर भी है। कोरोना के खतरे के बीच मकान मालिक किराएदारों पर किराया वसूलने के लिए दबाव नहीं बना पाएंगे। ऐसेा करने पर उन्हें अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है। जिला मजिस्ट्रेट बीएन सिंह ने बताया कि ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 1 वर्ष तक की सजा या अर्थदंड या दोनो हो सकता है और यदि आदेश के उल्लंघन से किसी भी तरह की जानमाल की क्षति होती है, तो यह सजा 2 वर्ष तक हो सकती है।

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