बिहार में ऐसे नेता की ज़रूरत जो किसी का पिछलग्गू न हो, स्वतंत्र विचार रखे : प्रशांत किशोर

Patna :  जदयू से निकाले जाने के बाद पहली बार पटना पहुंचे Prashant Kishore ने अपने चुनावी इरादे जाहिर कर दिए।उन्होंने बतायाकि पिछले 1.5 साल से मैं हर प्लेटफॉर्म पर कहता रहा हूं कि मैं ऐसे यंग लोगों को जोड़ना चाहता हूं जो बिहार को आगे ले जाएं। 20 फ़रवरी से मैं नया कार्यक्रम शुरू कर रहा हूं– ‘बात बिहार की बिहार के 8 हजार से ज्यादा गांवों से लोगों को चुना जाएगा जो यहसोचते हों कि अगले 10 साल में बिहार अग्रणी 10 राज्यों में शामिल हो। उन्होंने कहानीतीश कुमार से उनके मतभेद विचारधारा केचलते हैं। हमें सशक्त नेता चाहिए, पिछलग्गू नहीं।

उन्होंने कहा कि नीतीश ने उन्हें बेटे की तरह रखा है और वे भी उन्हें पिता तुल्य मानते हैं। इसलिए, पार्टी से निकालने समेत नीतीश के सारेफैसले उन्हें मंजूर हैं। नीतीश जी से मेरा संबंध विशुद्ध राजनीतिक नहीं रहा। दिल्ली में मैं और नीतीश जी पहली बार मिले थे। जब मैंजदयू में नहीं था तब भी और इसमें शामिल होने के बाद भी उन्होंने मुझे बेटे जैसे रखा। जिन्होंने देखा है मेरेउनके संबंध को, वे यह बातकन्फर्म कर देंगे। मेरे लिए वे पिता तुल्य हैं। उन्होंने मुझे शामिल करने और बाहर करने का जो फैसला किया, वो उनका एकाधिकार था।मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा। इस बात के लिए उनका सम्मान है। यह आदर आगे भी रहेगा। मेरा जब उनसे अच्छा संबंध रहा है, तो सवाल है कि मतभेद किस बात का है।

नीतीश से मतभेद के कारण गिनाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश जी कहते रहे हैं कि गांधी, जेपी और लोहिया की बातें हम नहींछोड़ सकते। वे लोगों को गांधी और लोहिया के विचार पढ़ा रहे हैं। क्या ऐसे में वे गोडसे की विचारधारा वालों के साथ खड़े हो सकते हैं।वे भाजपा के साथ खड़े होना चाहते हैं, वह ठीक है, लेकिन गांधी और गोडसे की विचारधारा साथ नहीं चल सकती है।

वे कहते हैं कि जीतने के लिए भाजपा के साथ बने रहना जरूरी है। मैं इससे सहमत नहीं हूं। मैं नीतीश जी के साथ नहीं हूं और फिर यहकह दूं कि विकास नहीं हुआ, यह ठीक बात नहीं। लेकिन, बिहार के विकास की गति और मानक ऐसे नहीं रहे कि इसे बेहतर कह दियाजाए।

आप 20 मानकों को उठा कर देख लीजिए। 2005 में बिहार की जो स्थिति थी, आज भी दूसरे राज्यों के मुकाबले बिहार की स्थिति उनमानकों पर वही बनी हुई है। नीतीश जी ने शिक्षा पर काम किया। साइकिल बांटी, पोशाक बांटी, बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। बच्चोंका स्कूल जाना भी बढ़ा, लेकिन अच्छी शिक्षा नहीं दे पाए। एजुकेशन इंडेक्स में बिहार सबसे नीचे है।

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