झारखण्ड लोकसभा चुनाव रिपोर्ट 2019

New Delhi

छोटानागपुर पठारी राज्य झारखण्ड में लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे राज्य की दशा-दिशा तय करने वाले हैं। झारखण्ड में 14 लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुए हैं। इन 14 लोकसभा सीट में कई दिग्गजों का भविष्य दांव में लगा हुआ है। चार-चरणों में संपन्न चुनाव में 29 अप्रैल, 6, 12 और 19 मई को मतदान हुए थे।

राष्ट्रीय पार्टी भारतीय जनता दल और कांग्रेस के अलावा क्षेत्रिय पार्टियां झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और झारखण्ड विकास मोर्चा भी मैदान में हैं। सियासत की इस लड़ाई में मुकाबला चिर-परिचित अंदाज में ही हो रहा है। झारखण्ड में लोकसभा चुनाव 2019 कई मायनों में खास रहा है। इस बार के चुनाव में मुद्दे जरूरी बुनियादों से ऊपर उठ चुके हैं। जल, जंगल और जमीन से जूझ रहे राज्य में अस्मिता का मुद्दा प्रखर होकर उभरा है।

वन्य संरक्षण अधिनियम, सरना धर्म कोड, भूमि अधिग्रहण, आधार आधारित पहचान, पत्थलगड़ी और रोजगार जैसे अहम मुद्दे विभिन्न पार्टियों के घोषणापत्रों में जोर-शोर से उठाई गई हैं। जंगल से मालियाना हक खोते लोगों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ वन्य संरक्षण अधिनियम में सुधार करने की मांग है। आधार को जरूरी बताकर पेंशन और अनाज मिलने में आ रही दिक्कतों को दूर करना भी इस चुनाव के अहम मुद्दों में से एक रहे हैं। काफी लंबे समय से इस राज्य के आदिवासी सरना धर्म कोड के लिए लड़ रहे हैं। इस मामले पर हो रहे आंदोलन ने राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दिया है। राष्ट्रीय पार्टियों ने तो नहीं लेकिन क्षेत्रिय पार्टियों ने यह मुद्दा काफी उछाला है और अपने घोषणापत्रों में इसे पूरा करने का वादा भी किया है।

राज्य में बढ़ती बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। रोजगार की चाह में लोगों का क्षेत्र से पलायन करना और लोहरदगा और गुमला जिले में मानव तस्करी का बढ़ता व्यापार चिंता का विषय है। ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा का विस्तार करना और इसके कार्य को सुचारू रूप से लागू करना भी शामिल है। सीएनटी एक्ट को लेकर गरमाई राजनीति को कम करना और इसमें जरूरी सुधार कर राज्य के मूल वासियों के हित में प्रयोग में लाना अहम मुद्दे हैं। अब देखना यह होगा कि सता में आने वाली सरकार अपने वादों के धरातल पर खरी उतरती है कि नहीं। जनता ने जिन उम्मीदों के साथ यह नई सरकार चुनी है, आखिर कब इन उम्मीदों को असली जामा पहनाया जाएगा।