1984 सिख दंगे में दो दोषियों को आज सुनाई जायेगी सजा, पीड़ित परिजन बोले- आरोपियों को हो फांसी

NEW DELHI:दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगो मामले में आरोपी नरेश सेहरावत और यशपाल सिंह को दोशी करार दिया और दोनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 452, 302, 307, 324, 395, 436 के तहत आरोपी माना। इस मामले को लेकर कोर्ट आज आरोपियों की सजा का ऐलान करेगा। आपको बता दें कि न्यायाधीश अजय पांडे ने नरेश सेहरावत और यशपाल सिंह को दंगों के दौरान दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर में हरदेव सिंह और अवतार सिंह की हत्या का दोषी ठहराया।

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यह मामला हरदेव सिंह के भाई संगत सिंह ने दर्ज कराया था। सजा के ऐलान पर संगत सिंह ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आरोपियों को फांसी की सजा मिलेगी तभी न्याय होगा। उन्होंने कहा कि हमने काफी मुश्किलें झेली हैं। हम शुक्रगुजार हैं दिल्ली की शिरोमणी कमिटी के जिन्होंने इंसाफ की इस लड़ाई में हमारा साथ दिया। आपको बता दें कि 31 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगा भड़का।

इस दंगे में अधिकारिक रूप से 2733 सिखों को निशाना बनाया गया, जबकि गैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 3870 थी। दंगों का सबसे ज्यादा असर दिल्ली पर हुआ। देशभर में सिखों के घरों और उनकी दुकानों को लगातार हिंसा का निशाना बनाया गया। हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया। इन दंगो को लेकर उस वक्त भी काफी राजनीति हुई।

सीबीआई ने कहा था कि ये दंगे राजीव गांधी के नेतृ्त्व में कांग्रेस सरकार दिल्ली पुलिस ने मिल कर कराये हैं। इस दौरान पीएम राजीव गांधी के एक बयान पर भी बहुत हंगामा हुआ था जिसमें उन्होंने कहा था कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तब पृथ्वी भी हिलती है। इस हमले के बाद से पूरा सिख समुदाय इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ हो गया था 1985 में इंदिरा गांधी के सिख अंगरक्षकों ने उनकी हत्या कर दी।

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