आज ही के दिन 1975 में इंदिरा गांधी को चुनावी भ्रष्टाचार का दो’षी करार दिया गया था

New Delhi :  याद करिए 1971 का लोकसभा चुनाव श्रीमती गांधी प्रचंड बहुमत से एक बार फिर देश की प्रधानमंत्री बनी और अपनी लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश के रायबरेली में भी भारी मतों से जीती। रायबरेली से इंदिरा के विरुद्ध चुनाव लड़े राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव में निर्वाचन के खिलाफ याचिका दायर की । जिसमें उन्होंने श्रीमती गांधी पर चुनावों में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया ।

4 सालों तक चली लंबी सुनवाई के बाद वह दिन आ ही गया जब कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाली थी । 12 जून 1975 को श्रीमती गांधी के सबसे वरिष्ठ निजी सचिव कृष्ण अय्यर शेषण बार- बार कमरे में इधर-उधर घूम रहे थे और उनकी नजरें सिर्फ टेलीफोन पर जाकर गड़ गई थी ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी खबर आने वाली थी। श्रीमती गांधी के सभी नजदीकी अफसर पूरे मामले की पल-पल की खबरों पर नजर बनाए हुए थे ।राज नारायण द्वारा दायर की गई याचिका पर फैसला न्यायधीश जगमोहन लाल सिन्हा देने वाले थे । उनके बारे में कहा जाता था कि वह बड़े ही वक्त के पाबंद, अनुशासनप्रिय, दवाब में ना आने वाले व्यक्ति थे ।दिल्ली में बैठी सरकार के अफसर जस्टिस सिन्हा पर लगातार नजर बनाए हुए थी कि वह कब घर से बाहर निकलते हैं और कहां-कहां जाते हैं ।

जस्टिस सिन्हा पर फैसले को टालने का खूब दवाब बनाया गया लेकिन वह कहा किसी की सुनने वाले थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने खुद सिन्हा को फैसला टालने के लिए कहा लेकिन जस्टिस सिन्हा उनकी बातों से इतने नाराज हुए कि उन्होंने तुरंत कोर्ट के रजिस्ट्रार को फोन घुमाया और 12 जून को फैसला सुनाने की घोषणा कर दी। इंटेलिजेंस ब्यूरो जस्टिस सिन्हा पर लगातार नजर बनाए हुए थी, लेकिन वह पता नहीं कर पा रही थी कि सिन्हा का अगला कदम क्या होगा ।

वक्त के पाबंद सिन्हा समय से कोर्टरूम पहुंच गए और अपने सामने 258 पेज के फैसले के साथ मौजूद सिन्हा ने कहा कि मैं इस केस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर केवल अपने निष्कर्षों को पढूंगा। कोर्ट रूम की हर गतिविधि की सूचना दिल्ली में बैठी श्रीमती गांधी को लागातार दी जा रही थी।

सुबह 10:02 बजे पर शेषण ने यूएनआई की मशीन पर घंटी की आवाज सुनी और फ्लैश मैसेज देखा। श्रीमती गांधी अपदस्थ । शेषण मशीन से पेज फाड़ कर दूसरे कमरे की तरफ भागे जहां श्रीमती गांधी बैठी हुई थी ,रास्ते में उन्हें राजीव गांधी मिले ,शेषण ने उनको खबर सुनाई। राजीव हड़बड़ा के श्रीमती गांधी के पास पहुंचे और कहा कि आप को अपदस्थ कर दिया गया है। कुछ देर बाद एक और फ्लैश मैसेज आया कि श्रीमती गांधी को 6 वर्षों के लिए किसी निर्वाचित पद पर बने रहने से भी वंचित कर दिया गया है । इस खबर ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया ।

सिन्हा ने उन्हें चुनावों में दो भ्रष्ट आचरणों का दोषी ठहराया था – पहला ,दोष की उन्होंने प्रधानमंत्री सचिवालय में काम करने वाले एक अधिकारी यशपाल कपूर का इस्तेमाल चुनाव में अपनी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया । दूसरी ,अनियमितता यह थी कि श्रीमती गांधी ने जिन मंचों से चुनावी रैलियों को संबोधित किया था जिन्हें बनाने के लिए यूपी के अधिकारियों की मदद ली गई थी। श्रीमती गांधी को अपदस्थ करने की खबर आग की तरफ फैल चुकी थी । 1 सफदरजंग रोड स्थित उनके आवास पर शांति पसर चुकी थी। धीरे-धीरे उनके सुभचिंतको का आना शुरू हो चुका था।