1957 के आम चुनाव में कांग्रेस को मिला था प्रचंड बहुमत,पहली बार संसद पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी

New Delhi: आज से 62 साल पहले भारत की जनता दूसरे लोकसभा चुनाव की गवाह बनी। कांग्रेस पार्टी को चुनावों में प्रचंड बुहमत मिला। पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के दोबारा प्रधानमंत्री बने। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि देश के सबसे बड़े और कालजयी नेताओं में शुमार अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे।

कांग्रसे ने 1951-52 में हुए पहले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार सात सीटें ज्यादा जीतीं। यह वह दौर था जब लोग मतदान केंद्रों के बाहर बैलेट पेपर के जरिए अपने वोट डालने के लिए खड़े नजर आते थे। न उस समय आज की तरह चुनावों में होने वाली तड़क भड़क थी और न ही अभी की तरह धनबल और बाहुबल का जोर।

दूसरे लोकसभा चुनाव में एक तरफ कांग्रेस तो उसके विपक्ष में वामपंथी, समाजवादी और दक्षिणपंथी पार्टियां भारती जनसंघ, अखिल भारतीय हिंदू महासभा एंव अखिल भारतीय राम राज्य परिषद जैसी पार्टियां चुनावी मैदान में थी। भारतीय जनसंघ इस चुनाव में भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया। उसके खाते में सिर्फ 1 सीट ज्यादा यानी 2 सीटें आई।

साढ़े तीन महीने तक चला दूसरा लोकसभा चुनाव-

दूसरे आम् चुनाव में कांग्रेस को वोट शेयर पहले आम चुनावों से ज्यादा रहा। पहले आम चुनाव में कांग्रेस को जहां 45 फीसदी वोट मिले थे दूसरे आम चुनावों में उसे 47.8 फीसदी वोट मिले। दूसरा लोकसभा चुनाव साढ़े तीन महीनों तक चला। यह चुनाव 24 फरवरी से 9 जून के बीच संपन्न हुआ।

सिर्फ 2 पार्टियों ने छुआ दहाई का आंकड़ा-

1957 के दूसरे आम चुनाव में सिर्फ दो ही पार्टियां दहाई का आंकडा़ छू पाईं। ये पार्टियां कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और सोशलिस्ट पार्टी थी। उस वक्त भारत में 13 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश थे। यह चुनाव इन 17 राज्यों के 403 निर्वाचन क्षेत्रों की 494 सीटों पर हुआ थ। चुनाव में 16 पार्टियों और कई सौ निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।

पहले लोकसभा चुनाव में 53 पार्टियों ने आजमाई थी किस्मत,2 ने छुआ था दहाई का आंकड़ा,489 थी सीटें

कांग्रेस ने जीती 371 सीटें-

भारत के दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 371 सीटें जीतीं। चुनाव में कांग्रेस के बाद निर्दलियों का बोलाबाला रहा। इस चुनाव में 542 निर्दलियों ने ताल ठोकी जिमें से 42 के सिर जीत का सेहरा बंधा। भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 111 प्रत्याशी मैदान में उतारे और इनमें से सिर्फ 27 प्रत्याशियों ने ही जीत का स्वाद चखा। प्रजा सोशललिस्ट पार्टी ने मैदान में 194 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 19 ने मैदान फतह किया। भारतीय जनसंघ ने 133 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे जिनमें से सिर्फ 4 ही जीत दर्ज कर सके।

भारत के दूसरे लोकसभा चुनाव में गणतंत्र परिषद पार्टी ने 15 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे जिनमें से 7 में जीत हासिल की थी। फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी के 5 में से 2 उम्मीदवारों ने चुनाव जीता। अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने 1 सीट पर जीत हासिल की।

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पहली बार संसद पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी-

इस चुनाव में ही अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार जनसंघ पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे। वाजपेयी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे और प्रधानमंत्री नेहरू उनकी भाषण शैली के इतने कायल हो गए कि कह डाला यह युवा एक दिन देश का प्रधानमंत्री जरूर बनेगा।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की यह बात सही साबित हुई और ठीक 39 साल बाद साल 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। दूसरे लोकसभा चुनाव में वाजपेयी मथुरा से राजा महेंद्र प्रताप से चुनाव हारे लेकिन बलरामपुर ने उन्हें संसद में पहुंचा दिया। अटल ने यहां कांग्रेस के नेता हैदर हुसैन को पराजित किया।

तीसरे नेहरू मंत्रिमंडल का हुआ गठन-

दूसरे लोकसभा चुनाव के बाद तीसरे नेहरू मंत्रिमंडल का गठन हुआ। गृहमंत्री की जिम्मेदारी पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने संभाली। विदेश मंत्रालय का जिम्मा जवाहर लाल नेहरू ने खुद अपने पास रखा। वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी थिरुवलु थातु कृष्णामाचारी के पास ता। बाद में 13 मार्च 1958 में मोरारजी देसाई ने वित्तमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।