105 साल की अम्मा ने दी चौथी कक्षा की परीक्षा, लाठी छोड़ थामी कलम

New Delhi: कहते हैं न पढ़ाई-लिखाई की न तो कोई उम्र होती है और न ही कोई वक्त होता है। केरल की 105 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने इस बात को अपने जीवन में आत्मसात किया है। भागीरथी अम्मा ने अपनी उम्र को धता बताते हुए शिक्षा की अलख को जगाने का प्रयास किया है। शिक्षा के प्रति अपनी जागरूकता दिखाते हुए 105 वर्षीय भागीरथी अम्मा ने आज चौथी कक्षा की परीक्षा में शामिल हुई हैं।

केरल राज्य साक्षरता मिशन के तहत यह परीक्षा आयोजित की गई है जिसमें अम्मा ने बड़े ही जोर-शोर से भाग लिया है। केरल की इस बुजुर्ग महिला ने ‘जब जागो तभी सवेरा’ जैसे मुहावरे को चरितार्थ किया है। इस उम्र में परीक्षा देना पढ़ाई-लिखाई के प्रति उनके समर्पण को दिखाता है। इस परीक्षा में शामिल होकर अम्मा ने दुनिया के सामने शिक्षा के महत्व को लेकर उदाहरण पेश किया है।

भागीरथी अम्मा, हमेशा से अध्ययन करने और ज्ञान प्राप्त करने के लिए तरसती रहीं थीं। उन्होंने अपना बचपन परेशानियों के साये में गुजारा है। उन्हें अपनी माँ के निधन के बाद खुद को शिक्षित करने का सपना छोड़ना पड़ा क्योंकि उन्हें अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करनी थी।

जब उन्हें अपने बचपन के सपने को फिर से जीने का मौका मिला, तो भला वो इससे कैसे पीछे हट सकती थीं। बस उन्होंने कदम बढ़ाया और अपनी जिंदगी के इस महत्वपूर्ण परीक्षा में हिस्सा लिया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने नाम के साथ आज एक रिकॉर्ड भी जोड़ लिया है। केरल राज्य साक्षरता मिशन कार्यक्रम में सबसे बुजुर्ग प्रतिभागी के रूप में वह पहचान बना चुकी हैं।