तोड़कर समाज की बेड़ियां,जा ‘जी ले अपनी जिंदगी’

“जा सिमरन जा”जैसे ही अमरीश पुरी काजोल का हाथ छोड़कर फिल्म के नायक शाहरुख खान के साथ जाने की इजाज़त देते हैं,सिनेमाघर गूंज उठते हैं तालियों की गड़गड़ाहट और सीटियों के शोर से। सिनेमाघरों से बाहर निकलते हर चेहरे पर संन्तुष्टि का भाव था,खुशी थी ‘हैप्पी एंडिंग’ की,खुशी थी इस बात की कि आखिर नायिका के पिता ने उसकी मोहब्बत को समाज की नैतिकता के तराजू पर नहीं तौला ।
लेकिन ठीक बीस साल बाद ‘एन एच 10’ देखकर सिनेमाघरों से बाहर निकलता हर चेहरा मायूस था| लोग तो उम्मीद लेकर आए थे ‘दिल वाले दुल्हनियां’ जैसी ‘हैप्पी एंडिंग’ की,लेकिन इस बार उन्हें वो सुखद अंत देखने को नहीं मिला । उन्होंने लोहे की रॉड से किसी के प्यार के शव को बर्बरता से छिन्न-भिन्न होते देखा था और बस इतना देख लेने भर से उनकी आंखें छलक आई ,लेकिन दिल में एक तसल्ली भी थी कि ये तो बस एक फिल्म है|
फिल्मों में मोहब्बत को मुकाम मिलने पर खुशी का इज़हार करने वाला ये समाज खुद ‘एन एच 10’ की तरह क्रूर है,निर्दयी है जहां प्रेम करना इतना बड़ा अपराध है जिसका अंजाम सिर्फ ‘मौत’ है|
फिल्मों में नायक-नायिका की प्रेम कहानी के सफल होने पर तालियां बजाने वाला यह समाज अपनी बेटी,अपनी बहन की मोहब्बत को हर तरह से नकार देता है और जब इनकी दकियानूसी सोच की बेड़ियों को ये प्रेमी तोड़ने की कोशिश करते हैं तो मार दिया जाता है उनको ।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल हजारों युवक-युवतियों की हत्या प्रेम में होने और अंतर्जातीय विवाह करने की वजह से कर दी जाती है| सरकार के द्वारा चलाए जा रहे जागरुकता अभियान और तमाम कानून भी प्यार के दुश्मनों से आजाद परिन्दों को बचाने में नाकाम रहे हैं।आज भी खाप पंचायतें प्रेमियों की जिंदगी का फैसला करती हैं।

हम आधुनिक दौर की उस त्रासदी के गवाह बन रहे हैं जिसमें क्रूरतापूर्वक प्रेमी जोड़ों को अलग कर दिया जाता है या मार दिया जाता है। समाज का दोहरापन यह है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से सम्पन्न परिवार प्रेम और विवाह के बारे में कोई भी फैसला लें, उन्हें बधाई देने की होड़ मच जाती है।
पिछले साल की ही बात है, सोशल मीडिया पर वायरल एक प्रेमी जोड़े के वीडियो में दिख रही लड़की ने कहा कि” वो एक-दूसरे से प्यार करते हैं और किसी भी स्थिति में ‘नून-रोटी’खाकर गुजारा कर लेंगे ,लेकिन एक-दूसरे के साथ ही जियेंगे और साथ ही मरेंगे ‘ठीक है’। लोगों ने भले ही इस वीडियो को हास्यास्पद नज़रिए से देखा हो लेकिन इस घोर प्रेम विरोधी समाज में भी प्रेमियों की द्रढ़ता और अपने प्रेम पर विश्वास का यह एक उदाहरण है जो दिखाता है प्रेम करते इन आजा़द परिन्दों के समाज की बुराई से लड़ने के मजबूत इरादों को।
फिल्मों,कविताओं और कहानियों तक ही प्रेम को स्वीकार करने वाले इस समाज से लड़ने की ताकत है इस युवा पीढ़ी में है । यह युवा पीढ़ी प्रेम पर कवितायें लिखने वाले तथाकथित सामाजिक सरोकारी कवियों की कविताओं में अपनी जगह तो बनाती है लेकिन वास्तविकता में ये तथाकथित कवि भी प्रेम विरोधी ही निकलते हैं।
तमाम बंदिशों,चुनौतियों और मौत के भय के बाद भी के बाद भी जो प्रेमी जोड़े अपनी मोहब्बत को लड़खड़ाने नहीं देते,जो अपनी बेतरतीब सी ज़िंदगी में भी खुशियों का रस घोल देते हैं,जो युवा सत्ता के शीर्ष सिंहासन को भी पलटने की ताकत रखते हैं,जो चट्टानों सी मुसीबतों का भी डटकर सामना करते हैं वो प्रेम करने वाले युवा इस समाज को बदलने की ताकत भी रखते हैं। जिनके प्यार , हिम्मत और लगन की न जाने कितनी ही कहानियों से इस देश का साहित्य और सिनेमा भरा पड़ा है। वो युवा पीढ़ी इस समाज के सारे आडम्बरों की इमारतों को ध्वस्त करने की ताकत रखती है ।समाज की काली सोच को बदलने की ताकत है इस युवा पीढ़ी में,हर सख्त पिता के कोमल दिल में प्रेम के लिए जगह भी बनाने की वैचारिक शक्ति है इस युवा पीढी़ में।समाज और परिवार की लड़ाई जीतकर प्रेम करने वाले ये आज़ाद पंछी ही बनाएंगे वो देश जहाँ समाज उनकी मुहब्बत को स्वीकार करेगा, जहाँ पिता आजादी देगा अपनी बेटी को और ऊंच-नीच की बेड़ियां तोड़ वास्तविकता में कहेगा ‘जा सिमरन जा,जी ले अपनी ज़िंदगी’।

 

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