'तीन मूर्ति चौक' को 'तीन मूर्ति हैफा चौक' कहिए! वर्ल्ड वार-I का 'हाइफा डे' है रिनेम का  कारण

'तीन मूर्ति चौक' को 'तीन मूर्ति हैफा चौक' कहिए! वर्ल्ड वार-I का 'हाइफा डे' है रिनेम का  कारण

By: shailendra shukla
January 14, 15:01
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New Delhi: इज़राइल के पीएमम बेंजामिन नेतन्याहू छह दिवसीय भारत दौरे पर पहुंच चुके है। वह सीधे तीन मूर्ति चौक का जाएंगे और वहां पहुंचते ही इसका नाम बदलकर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' कर दिया जाएगा।

इसके पीछे प्रथम विश्व युद्ध से जुड़ा वह इतिहास है जब भारतीय जवानों ने इजरायल के हाइफा शहर को मुक्त कराया था। इस्रायल के पीएम  तीन मूर्ति चौक और तीन मूर्ति मार्ग का नाम बदल दिया गया है। इनमें इस्राइल के शहर हैफा का नाम जोड़ा गया है। अब इन्हें तीन मूर्ति हैफा चौक और तीन मूर्ति हैफा मार्ग के तौर पर जाना जाएगा। एनडीएमसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा से ठीक पहले नाम बदलने को मंजूरी दी थी। यह फैसला दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई काउंसिल की मीटिंग में लिया गया था।

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इस्राइल के हैफा शहर को पहले विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने आजाद कराया था। इस युद्ध में कई भारतीय सैनिक मारे गए थे। तब से प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को भारत और इस्राइल में हाइफा डे मनाया जाता है। 

हाइफा युद्ध का इतिहास:

हाइफा का युद्ध 23 सितंबर 1918 को लड़ा गया था। यह युद्ध प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शांति के लिए सिनाई और फलिस्तीन के बीच चलाए जा रहे अभियान के अंतिम महीनों में लड़ा गया।

शहीद दलपत सिंह (फाइल फोटो)


इस दिन उस्मानी वंश के तुर्कों की सेनाओं को हाइफा शहर से बाहर कर दिया गया था। मेजर दलपत सिंह (एमसी) को हाइफा को मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए ऐतिहासिक वृतांत में ‘हाइफा के हीरो’ के रूप में याद किया जाता है।

दलपत सिंह को उनकी बहादुरी के लिए मिलिट्री क्रास से सम्मानित किया गया था। इस वजह से इंडियन मिलिट्री प्रति वर्ष हाइफा डे को सेलिब्रेट करती है।

23 सितंबर को हुए इस युद्ध में मेजर दलपतसिंह समेत सात हिन्दुस्तानी शहीद हुए। दिल्ली स्थित तीन मूर्ति स्मारक इसी युद्ध के शहीदों को समर्पित है। जिसका आज नाम बदल दिया गया है।

खास बात यह है कि एक मूर्ति मेजर दलपत सिंह की है, इजरायल 2018 में इस विजय दिवस की शताब्दी मनाएगा। गौर करने लायक तथ्य है कि इस विजय गाथा को इजराइली बच्चे अपने स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं।

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