जिद से जीता जहां- घर से निकाला गया, गुजारे को बेचा जूस, आज है देश का पहला ट्रांसमैन पायलट

New Delhi : एडम हैरी जिनकी उम्र है 20 साल। हैरी ट्रांसजेंडर हैं और आज देश के पहले ट्रांसजेंडर पायलट के रूप में अपने सपने को हकीकत में बदल रहे हैं। अपने सपनों को पूरा करने के लिए जितना मानसिक और शारीरिक कष्ट और संघर्ष हैरी ने झेला शायद ही किसी ने झेला हो। जब उनके परिवार वालों को पता चला कि उनका बेटा ट्रांसजेंडर है तो उन्होंने बेटे को घर से निकाल दिया। लोगों ने ताने दिए, तरह तरह की बातें कीं लेकिन हैरी अपने लक्ष्य से कभी नहीं डिगे।

अपने सपने के मुताबिक उन्होंने पढ़ाई करते हुए प्राइवेट प्लेन का लाइसेंस हासिल कर लिया और कमर्शियल पायलट बनने के लिए और मेहनत करने लगे। उनके इस जज्बे की केरल सरकार ने प्रशंशा करते हुए उन्हें पायलट बनने में पूरी मदद देने का वादा किया।
समलैंगिकता को सही ठहराने वाला कानून हमारे देश में भले ही लागू हो गया हो लेकिन समाज में लोगों को इसे स्वीकारने में अभी भी बड़ी झिझक दिखाई देती है। समाज में जब कोई ऐसा व्यक्ति दिखाई देता है तो अक्सर लोगों की आंखों में खटकने लगता है। यही एडम के साथ भी हुआ। केरल के थ्रिशूर जिले के रहने वाले एडम हैरी को बचपन से ही प्लेन उड़ाने का बड़ा शौक था।

अपने शौक को प्रोफेशन में बदलने के लिए एडम ने समस्याओं और संघर्षों से कभी समझौता नहीं किया। परिवार वालों ने भी उनके सपने को पूरा करने के लिए पूरा साथ दिया लेकिन जब एडम जोहानिसबर्ग से ट्रेनिंग लेकर लौटे तो हालात वैसे नहीं रहे।
उनके परिवार को उनके ट्रांसजेंडर होने का पता लगा। जिसके बाद परिवार ने एक साल तक उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। परिवार को लगा कि एडम किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है। परिवार वाले एडम को मनोचिकित्सक के पास भी ले गए। लेकिन जब एडम के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया तो परिवार वालों ने उनसे खुलकर बात की और समझाने की कोशिश की।

इसके बाद भी जब कुछ नहीं बदला तो घर वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया। हैरी घर से खाली हाथ निकले थे, इसलिए कई रातें उन्होंने सड़कों पर गुजारीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने एक बार कहा कि उन्हें सड़कों पर रहने के दौरान उनके पास खाने तक के लिए पैसे नहीं थे। मैं कई रात भूखा ही सोया। अपना पेट भरने के लिए जूस की दुकान पर नौकरी करने लगा, लेकिन यहां भी मेरे ट्रांसजेंडर होने की वजह से मुझसे भेदभाव होता था।

एडम हैरी ने प्राइवेट प्लेन का लाईसेंस तो हासिल कर लिया था लेकिन उन्हें कमर्शियल पायलट बनने के लिए कमर्शियल लाइसेंस की जरूरत थी। लाइसेंस को पाने के लिए उन्हें जिस ट्रेनिंग की जरूर थी उसकी फीस फरने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। अब इसके लिए उन्होंने संघर्ष करना शुरू किया। जब इसकी खबर केरल के सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट को लगी तो उन्होंने 2019 में उनकी मदद के लिए 23.34 लाख रुपये स्‍वीकृत किए और वे अभी अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं।

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