टैक्स चोरों का नया ठिकाना बना हॉन्गकॉन्ग और सिंगापुर, BIS ने जारी किया आंकड़ा

टैक्स चोरों का नया ठिकाना बना हॉन्गकॉन्ग और सिंगापुर, BIS ने जारी किया आंकड़ा

By: Rohit Solanki
September 14, 16:09
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NEW DELHI: भारतीयों द्वारा टैक्स चोरी से बचने के लिए विदेश में जमा संपत्ति का आंकड़ा 2007 से 2015 तक 90 पर्सेंट बढ़ा है। साल 2007 से 2015 तक यह आंकड़ा 62.9 अरब डॉलर हो चुका है। यह 2015 में देश के GDP का लगभग 3.1% है। इस भारतीय संपत्ति का 53% से अधिक अब एशियाई टैक्स आवास जैसे हॉन्गकॉन्ग, मकाऊ, सिंगापुर, बहरीन और मलेशिया में रखा गया है। आपको बता दें स्विस बैंकों में भारतीय संपत्ति का 31% हिस्सा है, जो की 2007 में लगभग 58% से नीचे था।

BIS ने पिछले साल तक डेटा के मूल और देश का खुलासा नहीं किया था। लेकिन यह पहली बार है जब बासेल आधारित बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) ने द्विपक्षीय विदेशी होल्डिंग्स पर जारी किए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया है। UCLA के अर्थशास्त्री गेब्रियल जुकेन और उनके सहयोगियों ने बताया कि दुनिया में कुल अपतटीय संपत्ति 8.6 खरब डॉलर थी, जो विश्व के GDP का लगभग 11.6% है। यह 2007 के बाद से 54% बढ़ा है। हालांकी गैर-वित्तीय संपत्तियां इन आंकड़ों में शामिल नहीं है।

अपरिवर्तक टैक्स चोरी में देश के GDP के किस हिस्से को दूर रखा गया है इसके संदर्भ में सभी देशों के बीच व्यापक असमानता है। UCLA के अर्थशास्त्री ने बताया कि यूरोप में संपत्ति बढ़कर 15% हो गई है और रूस, अमेरिकी समेत कई देशों की संपत्ति बढ़कर करीब 60% तक हो गई है। चीन में करीब 287 अरब डॉलर की अपतटीय संपत्ति है, जो कि चीन के 2015 जीडीपी का 2.4% है।

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