वो राइटर, जिसने 72 कहानियां लिखी, जिनको शतरंज खेलने का शौक था

वो राइटर, जिसने 72 कहानियां लिखी, जिनको शतरंज खेलने का शौक था

By: Naina Srivastava
November 15, 07:11
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New Delhi: जयशंकर प्रसाद हिन्दी के छायावादी युग के महान लेखक थे। वैसे तो जयशंकर प्रसाद के बारे में अधिकांश लोग जानते हैं कि वह केवल लिखने में महान थे, लेकिन ऐसा बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्हें लिखने के अलावा खाना बनाने और शतरंज खेलने का भी शौक था। 

जयशंकर प्रसाद हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। इन्होने एक साथ कविता,कहानी,नाटक और उपन्यास के क्षेत्र में हिन्दी को गौरन्वित किया। वह एक युग प्रवर्तक लेखक कहे जाते हैं। कवि के रुप में वह सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानन्दन पन्त, महादेवी वर्मा के साथ छायावाद के चौथे स्तम्भ के रूप में सामने आए। 

हालांकि इन्होंने अपनी रचनाओं में नाटक सबसे ज्यादा लिखे हैं। वह युग प्रवर्तक नाटककार थे।  इन्हें “कामायनी” पर मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ। आपको जानकार हैरानी होगी कि इन्होंने 48 सालों के छोटे जीवन में ही हिन्दी की सभी विद्याओं पर रचनाएं लिखी। 

30 जनवरी 1889 को काशी में जन्में जयशंकर प्रसाद की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वे गम्भीर प्रकृति के व्यक्ति थे। वे ‘नागरी प्रचारिणी’ सभा के उपाध्यक्ष भी थे। इनका जन्म प्रतिष्ठित सुंधनी साहू नाम के प्रसिद्ध वैश्य परिवार में हुआ था।
 इनके पिता‘बापू देवी प्रसाद’ कलाकारों का आदर करने के लिए विख्यात थे। 

जयशंकर प्रसाद जब छोटे थे तब ही उनके पिता का निधन हो गया था। जब वह बड़े हुए तो मां और भाई उन्हें अकेला छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह गए। मां-बाप और बड़े के देहांत के बाद मात्र 17 साल की उम्र में ही जयशंकर प्रसाद पर अनेक जिम्मेदारियां आ गई। परिवार के कुछ लोग इनकी पूरी संपत्ति हड़पना चाहते थे, लेकिन सभी का सामना जयशंकर ने बड़े ही धैर्य और गंभीरता के साथ किया। 

शिक्षा की बात की जाए तो उन्होंने पहले तो अपनी शिक्षा काशी के क्वींस कॉलेज से की, लेकिन संपत्ति हड़पने की चाल की वजह से उन्होंने घर से ही पढ़ाई करने की सोची। कुछ वक्त के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और घर में ही अंग्रेजी, हिन्दी, बंगला, उर्दू, फारसी, संस्कृत आदि भाषाओं का गहन अध्यन किया। जयशंकर प्रसाद साहित्यिक प्रवृति के व्यक्ति थे, इतना ही नहीं वह महादेव के सबसे बड़े भक्त भी थे और मांस मदिरा से दूर रहते थे। इन्होंने अपने साहित्य साधना से हिन्दी को अनेक उच्चकोटि के ग्रन्थ-रत्न प्रदान किए। इन्होंने वेद, इतिहास, पुराण व साहित्य का गहन अध्ययन किया।

जयशंकर प्रसाद ने कुल 72 कहानियां लिखी हैं, साल 1912 में इनकी पहली कहानी 'ग्राम' प्रकाशित हुई थी। इसके अलावा इनकी फेमस कहानियों में छाया,गुंडा,ममता,पुरस्कार,सालवती,छोटा जादूगर,आकाशदीप,आंधी,इंद्रजाल,गुलाम आदि हैं। इन्होंने कुल 3 उपन्यास लिखे हैं,जिनमें कंकाल,तितली और इंद्रावती शामिल है। अगर हम बात करें नाटक की तो बता दें कि इन्होंने कुल 13 नाटक लिखे हैं,जिनमें से 8 ऐतिहासिल,3 पौराणिक और 2 भावात्मक है।  



बता दें कि हिंदी के महान लेखक कहे जाने वाले जयशंकर प्रसाद क्षय रोग के कारण 48 साल में दुनिया से अलविदा कह गए। 15 नवंबर साल 1937 को कशी में उनका देहांत हो गया।

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