भोपाल गैस त्रासदी: सरकार सो रही है ‘कुंभकर्णी नींद’, आज भी पड़ा है सैकड़ों टन जहरीला कचड़ा

भोपाल गैस त्रासदी: सरकार सो रही है ‘कुंभकर्णी नींद’, आज भी पड़ा है सैकड़ों टन जहरीला कचड़ा

By: shailendra shukla
December 02, 16:12
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New Delhi/Bhopal: भोपाल गैस त्रासदी नाम से मशहूर वह भयानक रात्रि कोई नहीं भूल सकता। आज यानि 2 दिंसबर 1984 की रात्रि में Union Carbide India Limited (UCIL) में जहरीली गैस का एक टैंक फट जाता है और शुरू होता है लोगों की खांसने और दम घुटने से मौतों का सिलसिल!

लगभग 15,000 लोगों की मौत के बाद भी सूबे की सरकार ‘कुंभकर्णी नींद’ से नहीं जागी है।  दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में शुमार भोपाल गैस कांड के 33 साल बाद भी यूनियन  कार्बाइड कारखाने में 346 टन जहरीला कचरा मौजूद है।

भोपाल गैस त्रासदी का स्मारक

त्रासदी के 33 साल बाद भी इस जहरीले केमिकल को नष्ट करने का निर्णय ही नहीं हो पा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इंदौर के पास पीथमपुर में 10 टन कचरे का निष्पादन प्रयोग के बतौर किया गया, लेकिन इस कवायद का पर्यावरण पर कितना दुष्प्रभाव हुआ, इसकी रिपोर्ट का खुलासा होना बाकी है। बचे हुए जहरीले कचरे को कैसे ठिकाने लगाया जाए, इसे लेकर सरकार आज भी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच पाई है।

कुछ ऐसा था उस दिन का नजारा (फाइल फोटो)

क्या-क्या है जहरीले कचड़े में
 

सेविन व नेफथा वेस्ट -95 मी. टन
रियेक्टर वेस्ट – 30 मी. टन
सेमी प्रोसेस्ड कीटनासक – 56 मी. टन
बॉयलर और आसपास का जहरीला कचरा-मिट्टी – 165 मी. टन

फाइल फोटो


इन सवालों का जवाब नहीं है

- पर्यावरण को बचाते हुए जहरीला कचरा कब तक ठिकाने लग पाएगा?
- भविष्य के लिए सबक और निष्पादन का रोड मैप क्या रहेगा?


2016 के बाद नहीं हुई सुनवाई
 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 13-18 अगस्त 2015 तक पीथमपुर में 'रामके' कंपनी के इंसीनरेटर में जहरीला कचरा जलाया गया। ट्रीटमेंट स्टोरेज डिस्पोजल फेसीलिटीज (टीएसडीएफ) संयंत्र से इसके निष्पादन में पर्यावरण पर कितना असर पड़ा, इससे जुड़ी सारी रिपोर्ट केंद्रीय वन-पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। मामले में 3 मार्च 2016 के बाद सुप्रीम कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं हुई। रिपोर्ट का असर क्या हुआ है इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिली है।

लोगों ने फैक्टी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया था (फाइल फोटो)

त्रासदी पर एक नजर

-भारत के मध्य प्रदेश राज्य के भोपाल शहर में 2 दिसम्बर सन् 1984 की रात्रि भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई।
-भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ।
-इसमें 15,000 से अधिक लोगों की जान चली गई और भारी संख्या में लोग अपंगता के शिकार हिए।
-भोपाल गैस काण्ड में मिथाइलआइसोसाइनाइट (मिक) नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था।
-पहले अधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 2,259 थी। मध्यप्रदेश की तत्कालीन सरकार ने 3,787 की गैस से मरने वालों के रूप में पुष्टि की थी।
-दूसरे अनुमान बताते हैं कि 8000 लोगों की मौत तो दो सप्ताहों के अंदर हो गई थी और लगभग अन्य 8000 लोग तो रिसी हुई गैस से फैली संबंधित बीमारियों से मारे गये थे।
-2006 में सरकार द्वारा दाखिल एक शपथ पत्र में माना गया था कि रिसाव से करीब 558,125 सीधे तौर पर प्रभावित हुए और आंशिक तौर पर प्रभावित होने की संख्या लगभग 38,478 थी।
-3900 लोग तो बुरी तरह प्रभावित हुए एवं पूरी तरह अपंगता के शिकार हो गये।

कारखाने में घुंसने पर लगी है रोक
 

इस त्रासदी के उपरान्त भारतीय सरकार ने इस कारखाने में लोगों के घुसने पर रोक लगा दी। अत: आज भी इस दुर्घटना का कोई स्पष्ट कारण एवं तथ्य लोगों के सामने नहीं आ पाया है। शुरुआती दौर में सी बी आई तथा सी एस आई आर द्वारा इस दुर्घटना की छान-बीन की गई थी।

इस तरह से फैक्ट्री में दबी मिली थी लाशें (फाइल फोटो)

ये भी हैं त्रासदी से जुड़े आंकडे

-भोपाल की लगाभग 5 लाख 20 हज़ार लोगो की जनता इस विशैलि गैस से सीधि रूप से प्रभावित हुई।
-इनमें 2,00,000 लोग 15 वर्ष की आयु से कम थे और 3,000 गर्भवती महिलाये थीं।
-शुरुआती दौर में लोगों को खासी, उल्टी, आन्खो में उलझन और घुटन का अनुभव हुआ।

मृतकों के खोपडियों को इस तरह से बोरे में रखा गया था (फाइल फोटो)

पीड़ितों का आर्थिक पुनर्वास
-त्रासदी के 2 दिन बाद ही ही राज्य सरकार ने राहत का कार्य आरम्भ कर दिया था।
-जुलाई 1985 में मध्य प्रदेश के वित्त विभाग ने राहत कार्य के लिये लगभग एक करोड़ चालीस लाख डॉलर कि धन राशि लगाने का निर्णय लिया।
-अक्टूबर 2003 के अन्त तक भोपाल गैस त्रासदी राहत एव पुनर्वास विभाग के अनुसार 5,54,895 घायल लोगो को व 15,310 मृत लोगों के वारिसों को मुआवज़ा दिया गया है।

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यूसीसी के अध्य्क्ष और सीईओ वारेन एन्डर्सन (दाएं) और उनके खिलाफ प्रदर्शन करते लोग (बाएं) (फाइल फोटो)

गिरफ्तारी के 6 घंटे बाद ही मिल फैक्टी मालिक को जमानत
 

दुर्घट्ना के 4 दिन बाद 1984 को यूसीसी के अध्य्क्ष और सीईओ वारेन एन्डर्सन की गिरफ्तारी हुई लेकिन 6 घंटे बाद ही उसे मामूली जुर्माने के शुल्क पर जमानत दे दी गई।

कुशवाहा परिवार को यज्ञ ने बचाया!

इस गैस काण्ड में भोपाल का कुशवाहा परिवार बिना किसी हानि के बच गया। क्योंकि उस परिवार में प्रतिदिन अग्रिहोत्र किया जाता था और उस दिन भी किया जा रहा था। अग्निहोत्र एक प्रकार का यज्ञ होता है, जो आदिकाल से भारतीय संस्कृति का अंग रहा है। यज्ञ को वातरण में प्रदूषण के समाधान के लिये वैज्ञानिक उपकरण माना जाता है।

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