भाई बनकर संजय ने कराई पांच सौ गरीब लड़कियों की शादी, सबका पूरा खर्च उठाया

भाई बनकर संजय ने कराई पांच सौ गरीब लड़कियों की शादी, सबका पूरा खर्च उठाया

By: Ravi Raj
January 13, 14:01
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New Delhi : लड़की वाले रंगीन टीवी की फरमाइश नहीं पूरी कर पाए तो दूल्हे के पिता ने खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। लड़की का पिता हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा, मगर दहेजलोभी लड़के का बाप बारात लेकर वापस चला गया। 

दो दशक पहले जौनपुर के एक गांव में महज रंगीन टीवी के लिए एक शादी टूटने की यह घटना उस लड़के के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। दहेज के इस नग्ननाच की घटना ने उस युवा को बेचैन कर दिया।  सोचा, न जाने कितने लाचार मां-बाप ऐसे होंगे, जिनकी बेटियों के हाथ दहेज के कारण नहीं पीले हो पाते होंगे। 

अब कोई गरीब लड़की बिना ब्याही नहीं रहेगी

बस फिर क्या था, उस युवा ने ऐसे परिवारों की मदद का बीड़ा उठाने का संकल्प लिया। छेड़ दिया सामूहिक विवाह का मिशन। नारा दिया-सामूहिक विवाह शर्म नहीं स्वाभिमान है। तब के लड़के की पहचान आज के संजय सेठ की है। 40 साल के संजय अब तक बतौर भाई पांच सौ बहनों की शादी का फर्ज निभा चुके हैं। जौनपुर और आसपास के जिलों में ऐसे गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बने हैं, जो दहेज और भारी खर्च के कारण बेटियों की शादी करने में असमर्थ हैं।

संजय ने अपने सपने को पूरा  करने के लिए 1994 में जेब्रा संस्था की स्थापना की। शुरुआत में सिर्फ नौ लोग जुड़े। फिर कारवां बढ़ता गया। शुरुआती तीन साल के बीच संजय ने कुल नौ जरूरतमंद जोड़े तलाशे। फिर पहली बार जौनपुर के महिला दीक्षा विद्यालय में सर्वधर्म सामूहिक विवाह कराया। पहले आयोजन की सफलता के बाद अब हर तीन साल पर संजय सेठ जौनपुर में सामूहिक विवाह का आयोजन करते हैं। अब तक पांच सौ से अधिक कन्याओं की शादी करा चुके हैं।

हर तीन साल में करते हैं आयाेजन
पिछले दस दिसंबर को 50 से अधिक जोड़ों की शादी कराई।  सामूहिक विवाह इसलिए भी खास है कि इसमें जाति, धर्म कहीं आड़े नहीं आता। हिंदू और मुस्लिम जोड़ों की एक साथ शादियां होती हैं। पंडाल मे एक तरफ वेदमंत्रों की गूंज से हिंदू पद्धति से शादियां होती हैं तो दूसरी तरफ निकाह की रस्में भी अदा होती हैं। अमूमन देखने में आता है कि तमाम जातीय संगठनों की ओर से स्वजातीय लड़कियों की ही शादी कराई जाती है, मगर जेब्रा के आयोजन में ऐसा कुछ भी नहीं है। 

सामूहिक विवाह सिर्फ रस्मअदायगी नहीं रहता। जिस दिन आयोजन होता है पूरे जौनपुर शहर में धूमधाम से बारात निकलती है। पूरे लाव-लश्कर के साथ। उस बारात में पूरे शहर के लोग ठुमके लगाते हैं। इसी बहाने दहेजरहित विवाह का संदेश लोगों को मिल जाता है, वही शादी में शामिल दूल्हे-दूल्हन के परिवार सहित सभी लोगों को एक अलंग ही आनंद की अनुभूति मिलती है। 

शादी में संस्था की ओर से दूल्हनों को बेड-बिस्तर, जेवरात, कपड़े, साजोश्रृंगार के सभी सामान, सिलाई मशीन आदि वस्तुएं उपहार में दी जाती हैं। इस शादी में जौनपुर के सभी प्रमुख गणमान्य लोग सामर्थ्य के हिसाब से वस्तुएं भेंट करते हैं। संजय सेठ कहते हैं कि-दहेज के दानव के खात्मे के लिए वे आजीवन संघर्ष करते रहेंगे।

सामूहिक विवाह के आयोजन में बहुत सारे लोग मदद कर रहे हैं, हालांकि इस मुहिम से सभी लोगों को जुड़ना चाहिए। अगर लोग जोड़ों को मदद न कर पाएं तो कम से कम जागरूकता फैलाने में ही मदद करें। ताकि समाज से दहेज के दानव का खात्मा हो सके।

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