दिल्ली एनसीआर पर स्मॉग की मोटी चादर, सुबह में भी रात का नजारा, सांस की तकलीफें बढ़ीं

New Delhi : दिल्ली एनसीआर को स्मॉग ने घेर लिया है। सारे उपाय धरे के धरे रह गये हैं। वो भी तब जब पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का काम कम हो रहा है। हालात ऐसे हो रहे हैं कि दिल्ली एनसीआर में सुबह के समय विजिबलिटी भी न के बराबर है। ऐसा लग रहा है कि चारो तरफ अंधेरा है। आज 15 अक्टूबर को सुबह स्मॉग की वजह से गाड़ियां हेडलाइट ऑन करके चलते हुये दिखीं। यही नहीं आसमान में स्मॉग इस तरह तारी है कि सूर्य की रौशनी भी मध्यम पड़ी हुई है। मौजूदा स्मॉग से यह बात साफ हो गई है कि आनेवाले ठंड के मौसम में प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर पर रहेगा। सांस की तकलीफ आम होगी।

जिन लोगों को सांस की तकलीफ पहले से है उनकी परेशानी और अधिक बढ़ने वाली है। दिल्ली में हालात सबसे बुरे हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम में भी प्रदूषण से लोगों की जीवन हलकान है। प्रदूषण के हालात को देखते हुये दिल्ली में बड़े-बड़े कंस्ट्रक्शन साइट पर एंटी स्मॉग गन डिप्लॉय किये गये हैं। कोरोना की वजह से इस बार ठंड में हालात और अधिक कठिन होनेवाले हैं। बहरहाल आज से प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये कई उपाय शुरू किये गये हैं।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 15 अक्टूबर से अगले आदेश तक दिल्ली में डीजल, पेट्रोल या केरोसिन से चलने वाले सभी क्षमता के जेनरेटर के उपयोग को प्रबंधित कर दिया है। बिजली कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाये। राजमार्ग और मेट्रो सहित बड़ी निर्माण कंपनियों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण समितियों को हलफनामा देना होगा कि धूल प्रबंधन के लिये वे तय नियमों का पालन करेंगे।

हालांकि निर्देश जारी हो गये हैं लेकिन अमल नहीं हो रहा है। एनसीआर में कहीं भी स्मॉग गन नहीं लगाये गये हैं। बड़े-बड़े कंस्ट्रेक्शन साइट पर भी प्रदूषण रोकथाम के उपाय नहीं हो रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

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