इस भारतीय क्रिकेटर ने खेले सिर्फ दो वनडे मैच, लेकिन रणजी में किया ये कमाल

इस भारतीय क्रिकेटर ने खेले सिर्फ दो वनडे मैच, लेकिन रणजी में किया ये कमाल

By: Varsha
August 12, 07:08
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NEW DELHI:

 आज हम एक ऐसे पूर्व भारतीय क्रिकेटर की बात करेंगें जिन्होंने भले ही दो वनडे मैच खेले हो लेकिन यूपी क्रिकेट को नई पहचान दी और बुलंदियों तक ले गए। 

भारतीय टीम के बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज ज्ञानेंद्र पांडेय का जन्म 12 अगस्त 1972 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था।  बाएं हाथ के बल्लेबाज ज्ञानेंद्र पांडेय एक ऐसा बल्लेबाज था जो एक बार क्रीज पर जम गया तो उसे वहां से हटाना मुश्किल होता था।   पांडेय ने बाएं हाथ के स्पिन को भी बोल्ड कर दिया, जिसकी वजह से वो एक प्रतिस्पर्धी ऑलराउंडर बन गए। उन्होंने अपने 18 साल के कैरियर में 5,348 फर्स्ट क्लास रन बनाये और 36.38 और 35.78 के करीब-समान औसत पर 165 विकेट लिए। पांडेय को 1990 के दशक में उत्तर प्रदेश क्रिकेट की रीढ़ की हड्डी माना जाता था।

पांडेय 2005-2006 में शानदार खेल खेला। और इतिहास में पहली बार उत्तर प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी जीती और 39 ओवर में 399 रनों का योगदान दिया।  पांडेय ने आशिष विंस्टन जैदी के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश  की क्रिकेट में एक मजूबत जगह बनाई। इन्होंने सबसे पहले यूपी के लिए रणजी ट्रॉफी जीती और बाद में लगातार उपविजेता रहे। इन्होंने देशभर में यूपी क्रिकेट को एक नई पहचान दी। और आगे चलकर बुलंदियों तक ले जाने की कोशिश की। देवधर ट्रॉफी में पांडेय ने नाबाद 17,72,26 रन बनाए साथ ही 4 मैचों में 10 विकेट भी लिये। ये उन्होंने सेन्ट्रल कैप्टन के तौर पर किया। इस शानदार प्रदर्शन के लिए इन्हें इंटरनेशनल कैप भी दी गई।  

 पांडेय ने पाकिस्तान के खिलाफ 1998-99 पेप्सी कप में  दो एकदिवसीय मैच खेले। जिसमें उन्होंने पहला वनडे डेब्यू मैच जयपुर में 24 मार्च 1999 को खेला था इस मैच में इनिंग में उन्हें 2 गेंद पर स्टंप किया गया था। अपना आखिरी  और दूसरा मैच पाकिस्तान के खिलाफ ही 1 अप्रैल1999 को खेला। इस मैच में पांडेय 9 गेंद पर 4 बनाकर नाबाद रहे।  पांडे ने 2003 से 2005 तक लंकाशायर लीग में टॉडमॉर्डन के लिए खेला। बाद में उन्होंने बीसीसीआई के जूनियर चयन समिति के सदस्य के रूप में काम किया।

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