8 साल की बच्ची से हारे धोनी- पूछे ऐसे सवाल की माही को आ गया पसीना

8 साल की बच्ची से हारे धोनी- पूछे ऐसे सवाल की माही को आ गया पसीना

By: Adill Malik
November 14, 20:11
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New Delhi : आज CHILDREN'S DAY पर चौथी क्लास में पढ़ने वाली Shivangini Chaudhary भारत के दिग्गज खिलाड़ी Mahendra Singh Dhoni का इंटरव्यू लेती नजर आई।

वसंत विहार के श्री राम स्कूल में पढने वाली इस प्यारी सी छात्रा ने धोनी को अपने सवालों से चित कर दिया।

उन्होंने पूछा, आपका किक्रेट में कौन सा यादगार पल कौन सा था? 

मेरे लाइफ में काफी हसीन पल आए। लेकिन 2011 का वर्ल्ड कप मेरे लाइफ का सबसे खास लम्हा था। भारत में अपने दर्शकों के सामने खेलना काफी अद्भुत था। 

आपकी किन खूबियों ने आपको भारतीय टीम का कप्तान बनने में मदद की?

ये अबतक का सबसे कठीन सवाल है। मुझे काफी सीनियर प्लेयरों ने सपोर्ट किया। जब मुझे कप्तानी देने की बात हो रही थी, तब में बातचीत में नहीं था। सच कहूं, तो गेम को पढ़ना मेरी सबसे बड़ी खूबी है। 

आपको कैसा लगा जब आपने वर्ल्ड कप फाइनल में छक्का मारकर जीत दिलाई? 

मेरा छक्का मारकर जीत दिलाने का कोई प्लान नहीं था। ये बस एक दम से हो गया। छक्का मारते ही मैं बस बॉल को देख रहा था, जब बॉल स्टेडियम में पहुंच गई तब अहसास हुआ मैंने कर दिखाया। 


पहली बार इंडियन टीम के ड्रेसिंग रूम में बतौर खिलाड़ी आने का पल कैसा था? 

यह बहुत अजीब था। हम बांग्लादेश के छोटे टूर पर गए थे और हमने तीन मैच खेले। मुझे लगा कि तीनों गेम चार दिन में खत्म हो गए। ये टूर मेरे लिए मिला-जुला रहा।

शिवांगिनी ने पूछा, क्या जीवा शरारती हैं ?

धोनी इस सवाल को सुनकर मुस्कुरा पड़े और उन्होंने ने चेहरे पर एक स्माइल के साथ बोला कि हां, जीवा बहुत ही शरारती हैं और उसको पाकर हम खुद को बहुत खुशनसीब समझते हैं, मुझे आज भी याद है जब जीवा दो साल की थी तब हमने उसके साथ पहले बार सफर किया था, उसने रात को भी हमें परेशान नहीं किया। वह टाइम से उठती और समय पर सो ही जाती थी। जीवा खाना भी बड़े अच्छे से खाती थी। ये सब चीजें बहुत जरुरी होती हैं जब आपका बच्चा इतना छोटा हो तो और जीवा सब सब कुछ तरीके से करती थी।

जब भी खेलने का नंबर आता था तो वह बहुत सावधान हो जाती थी, वह ध्यान से देखती थी कि मेरे आस-पास क्या चल रहा है, कहीं उसे चोट ना लग जाए। जीवा को लेकर हम बेफिक्र हो जाते थे कि उसे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ने पर उसको कहीं चोट तो नहीं लग जाएगी, क्यूंकि इसकी संभावना बहुत कम रहती थी। मुझे इस बात को लेकर खुश हो जाता हूं कि जीवा आस-पास घट रही चीजों को लेकर बहुत सक्रिय रहती है, वह हमेशा इस इस बात को फॉलो करती हैं। जीवा दोपहर में थोड़ी देर के लिए सोती जरुर हैं लेकिन वह हमेशा एक्टिव रहती है।

जब भी खेलने का नंबर आता था तो वह बहुत सावधान हो जाती थी, वह ध्यान से देखती थी कि मेरे आस-पास क्या चल रहा है, कहीं उसे चोट ना लग जाए। जीवा को लेकर हम बेफिक्र हो जाते थे कि उसे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ने पर उसको कहीं चोट तो नहीं लग जाएगी, क्यूंकि इसकी संभावना बहुत कम रहती थी। मुझे इस बात को लेकर खुश हो जाता हूं कि जीवा आस-पास घट रही चीजों को लेकर बहुत सक्रिय रहती है, वह हमेशा इस इस बात को फॉलो करती हैं। जीवा दोपहर में थोड़ी देर के लिए सोती जरुर हैं लेकिन वह हमेशा एक्टिव रहती है।

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