जिसे कामयाब हो जाने का नहीं था यकीन,आज लाखों बेटियों की है प्रेरणा,दुनिया में बढ़ाया भारत का मान

जिसे कामयाब हो जाने का नहीं था यकीन,आज लाखों बेटियों की है प्रेरणा,दुनिया में बढ़ाया भारत का मान

By: Adill Malik
November 14, 19:11
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दूसरी लड़कियों की ही तरह अपने सपनों को लेकर बड़ी हुई सानिया मिर्जा देखते ही देखते भारत की नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी बन जाएंगी ये तो उन्होंने भी नहीं सोचा होगा। भारत की बेटियों की आदर्श बनीं सानिया आज टेनिस की दुनिया में एक जाना-माना नाम हैं, उन्होंने देश से लेकर विदेशों तक तिरंगा कभी झुकने नहीं दिया।

मुंबई में जन्मी सानिया मिर्जा की शुरुआती पढ़ाई हैदराबाद के एनएएसआर स्कूल में हुई। हैदराबाद के ही सेंट मैरी कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई पूरी की। सानिया के पिता इमरान खेल रिपोर्टर थे और मां नसीमा मुंबई में प्रिंटिंग व्यवसाय से जुड़ी एक कंपनी में काम करती थीं। सानिया का बचपन पारंपरिक मुस्लिम खानदान में गुजरा। सानिया को कामयाब बनाने में उनके पिता का अहम योगदान है। हैदराबाद के निजाम क्लब में सानिया ने छ्ह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। 

महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस प्लेयर सीके भूपति से सानिया ने अपनी शुरुआती कोचिंग ली। पैसे की कमी के चलते सानिया के पिता ने कुछ बड़े व्यापारिक समूहों से स्पॉन्सरशिप ली। हैदराबाद से शुरुआत के बाद सानिया अमेरिका की टेनिस अकेडमी भी गई। मात्र 14 साल की उम्र में 1999 में सानिया ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत वर्ल्ड जूनियर टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर की। 2003 में सानिया की किस्मत तब चमकी जब वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद उन्होंने जूनियर विंबलडन में डबल्स में जीत हासिल की। 

2009 में भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली सानिया पहली महिला खिलाड़ी बनी थी। 2007 में सानिया की एकल में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 27 तक पहुंच गई थी जो किसी भी भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी के लिए सबसे ज्यादा थी। 2006 में दोहा में हुए एशियाई खेलों में उन्होंने लिएंडर पेस के साथ मिश्रित युगल का स्वर्ण पदक जीता। महिलाओं के एकल मुकाबले में दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता। 

2009 में उन्होंने महेश भूपति के साथ ऑस्ट्रेलियन ओपन का मिक्स डबल्स खिताब जीता। इसी के साथ वो ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। 2015 में सानिया और हिंगिस की जोड़ी ने नंबर-1 की रैंकिंग हासिल की। इस साल उन्होंने अपनी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ ऑस्ट्रेलिया ओपन खिताब जीता। वो नंबर वन टेनिस रैंकिंग तक पहुंचने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। वो पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से भारत की नंबर वन महिला टेनिस प्लेयर बनी हुई हैं।

16 साल की उम्र में 2004 में सानिया मिर्जा को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। महज 18 साल की उम्र में 2006 में 'पद्मश्री' से नवाजा गया। वो यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं। 2006 में ही सानिया को अमेरिका में वर्ल्ड टेनिस की दिग्गज हस्तियों के बीच डब्लूटीए का 'मोस्ट इम्प्रेसिव न्यू कमर' चुना गया। 2015 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड और 2016 में पद्मा भूषण से नवाजा गया। 

वर्ष 2009 में सानिया की सगाई उनके बचपन के दोस्त सोहराब मिर्जा से हुई, लेकिन सगाई शीघ्र ही टूट गई और वे पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक के साथ दिखने लगी। सानिया ने एक बयान में कहा, कि हम कई सालों से दोस्त हैं लेकिन मंगेतर की हैसियत से हम दोनों के बीच बात नहीं बनी। मैं सोहराब को उसकी ज़िंदगी के लिए शुभकामनाएं देती हूं। कुछ महीने बाद 12 अप्रैल 2010 को उन्होने शोएब मलिक के साथ निकाह रचाया। 

इस निकाह को लेकर उन्हें कई लोगों से कड़ी प्रतिक्रियाएं भी मिली लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और हर मोर्चे पर अपने पति का साथ दिया। वर्ष 2014 में नवगठित भारतीय राज्य तेलंगाना के ब्रांड एम्बेसेडर बनाए जाने पर सानिया फिर विवादों में घिरी, जब तेलंगाना विधानसभा में भाजपा नेता के। लक्ष्मण ने उन्हे 'पाकिस्तान की बहू' क़रार दिया और उन्हें यह सम्मान दिए जाने पर सवाल उठाया।

उपलब्धियां
2009 में महेश भूपति के साथ ऑस्ट्रेलियन ओपन का मिक्स डबल्स खिताब जीता।
2012 में महेश भूपति के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स डबल्स खिताब जीता।
2014 में ब्राजील के ब्रूनो सुआरेस के साथ यूएस ओपन मिक्स डबल्स खिताब जीता।
2015 में मार्टिना हिंगिस के साथ विंबलडन का डबल्स खिताब भी अपने नाम किया।
2015 में मार्टिना हिंगिस के साथ यूएस ओपन का डबल्स खिताब भी अपने नाम किया।
2016 में मार्टिना हिंगिस के साथ ऑस्ट्रेलियाई ओपन का डबल्स खिताब जीता।
इसके अलावा सानिया मिर्जा मिक्स डबल में तीन बार और डबल में एक बार उपविजेता भी रही हैं।

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