चीन को बहनों का जवाब- बाजारों में नहीं खरीदी जा रहीं चीनी राखियां, ऑनलाइन में भी स्वदेशी का बोलबाला

New Delhi : भारत-चीन के बीच पिछले 2 महीनों से जारी गतिरोध के चलते इस बार रक्षाबंधन पर बाजारों से चीनी राखियां नदारद हैं। भारत का कोई त्यौहार हो उसमें चीनी सामान की दखल हर साल देखी जाती है। लेकिन इस बार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध के चलते ये पहली बार है जब किसी भारतीय त्यौहार पर चीनी सामान गायब है। ऐसे में हर ओर के बाजर इस बार स्वदेशी राखियों से सजे दिखाई दे रहे हैं।
कोरोना वायरस के चलते हांलाकि बाजारों में पहले जितनी भीड़ नहीं है लेकिन फिर भी त्यौहार के नजदीक आने से बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ी है। बाजार में 3 रुपये से लेकर 80 रुपये तक की स्वदेशी राखियां खूब बिक रही हैं। देहरादून के व्यापारी इस बार भारत में बनी राखी ही बेच रहे हैं। एक दुकानदार ने बताया- हमने भारतीय राखी का स्टॉक लगाया है, हम न तो चाइनीज राखी लाए हैं और न ही हम सलाह देंगे कि ग्राहक चाइनीज राखी खरीदें। चीन से हम जो लड़ाई लड रहे हैं हम चाहेंगे कि भारतीय वो लड़ाई जीतें।
बता दें अगले महीने की 3 तारीख को रक्षा बंधन पड़ रही है। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए टिकटॉक, हेलो, यूसी ब्राउजर जैसे चीन के 59 मोबाइल ऐप्स पर बैन लगा चुका है।
वहीं कोरोना वायरस के चलते इस बार राखियों के बाजार में असर दिख रहा है। बीते वर्ष के मुकाबले इस बार 70 प्रतिशत तक ही राखियों का कारोबार होने की उम्मीद हैं। वहीं चाईनीज राखियां भी बाजार से पूरी तरह से नदारद हैं। घाट रोड पर राखी की दुकान लगाने वाले सतीश कुमार ने बताया बीते साल की अपेक्षा इस साल कम राखियां बिक रही है।

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