शहीद शंकर बात कर रहा था, बोला – मां फोन रख, फायरिंग शुरू हो गई, इनसे निपटू फिर कॉल करूंगा

New Delhi : शुक्रवार वो अपने साथी जवानों के साथ बंधकों को छुड़ाने निकला था। इसी दौरान मां ने कॉल कर दिया। वो मां और परिवार से बात करने लगा। लेकिन तभी… गोलियां चलने लगीं। मां फायरिंग शुरू हो गई है, अभी फोन रखता हूं, बाद में करूंगा…। देश की रक्षा के लिए शहादत देने वाले पिथौराढ़ के जवान शंकर सिंह महरा के यह अपनी मां से फोन पर कहे गए अंतिम शब्द थे। अपने लाल की शहादत की खबर सुनने के बाद मां बदहवास है तो पत्नी बेहोश है।


जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में गंगोलीहाट तहसील के नाली गांव के नायक शंकर सिंह महरा के शहीद होने से पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है। शहादत की खबर मिलते ही शहीद की मां और पत्नी बेहोश हैं। पूर्व सैनिक पिता की आंखे पथराई हैं। शहीद का अबोध पांच साल का बेटा गुमसुम है। जिसे देख कर ढांढस बंधाने वाले भी रो रहे हैं।
21 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात नायक शंकर सिंह महरा सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार से थे। पिता मोहन सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं। शहीद का छोटा भाई नवीन सिंह भी सेना के राष्ट्रीय रायफल में है और वर्तमान में जम्मू कश्मीर में तैनात है। जो शहीद के पार्थिव शरीर के साथ घर आ रहा है। शनिवार की रात्रि खबर को सुनने के बाद शहीद की मां जानकी देवी और पत्नी इंदु बदहवास हो गये। आसपास के ग्रामीणों ने दोनों को होश में लाया। ग्रामीण उनको ढांढस बंधाने में जुटे हैं।
शंकर सिंह महरा 11 वर्ष पूर्व सेना में भर्ती हुआ था। वर्तमान में 21 कुमाऊं रेजिमेंट में नायक पद जम्मू कश्मीर में तैनात था। सात साल पूर्व शादी हुई थी। पांच वर्षीय एक पुत्र हर्षित है। वह मां के साथ रह कर हल्द्वानी में पब्लिक स्कूल में एलकेजी में पढ़ता है। लॉकडाउन के चलते इस समय मां और बेटा गांव आये हैं। शंकर अपने मृदु व्यवहार को लेकर ग्रामीणों का चहेता था। शंकर की शहादत की खबर से पूरा गांव रो रहा है। शंकर सिंह महरा डेढ़ माह पूर्व अवकाश पूरा करने के बाद ड्यूटी में लौटा था। जाते समय मां से जल्दी घर आने को कह कर गया था। इधर मात्र डेढ़ माह बाद ही शहीद होने की सूचना मिली है। जिसे याद कर मां रो रही है ।
शंकर सिंह जब सीमा पर शहीद हुए तो शुक्रवार की देर शाम को ही गांव में खबर पहुंच गई, लेकिन उनकी माता को यह दुखद समाचार नहीं सुनाया गया। शनिवार की सुबह जब गांव के लोग वहां पहुंचने लगे तो उन्हें कुछ अनहोनी की आशंका हुई। उन्होंने पूछा कि कहीं उनके शंकर के साथ कुछ हुआ तो नहीं। फिर जब बेटे की शहादत की खबर उन्हें दी गई तो वह गश खाकर गिर पड़ीं।


शहीद शंकर सिंह जनवरी में छुट्टी पर घर आए थे। एक माह की छुट्टी पूरी करने के बाद ही फरवरी में यूनिट लौट गए थे। इससे पहले वह महाकाली मंदिर में सेना की ओर से किए गए धर्मशाला के निर्माण के दौरान भी आए थे। शहीद के पूर्व सैनिक पिता मोहन सिंह चुपचाप हैं। खुद सैनिक रहे पिता जैसे तैसे अपने को संभाले हैं। घर पर जो हो रहा है उसे देख कर शहीद का पांच वर्षीय पुत्र हर्षित गुमसुम है। शहीद की एक बहन है जिसकी शादी हो गई है। शहीद की पत्नी इंदु दो वर्ष पूर्व शहीद हुए सुगड़ी गांव निवासी शहीद पवन सिंह की चचेरी बहन है। इंदु के दादा स्व. देव सिंह वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद हुए थे। शहीद का पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव पहुंचेगा।

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