मजदूरों को बसे से ले जाते हुये

देशभर में फंसे मजदूरों-छात्रों के लिए 6 श्रमिक ट्रेनें : जयपुर से पटना, कोटा से हटिया भी शामिल

New Delhi : देश के विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए अब केंद्र सरकार ने स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। मंत्रालय की संयुक्त सचिव पीएस श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य सरकारें इसके लिए रेलवे बोर्ड से संपर्क करके प्लान तैयार कर लें। रेलवे ने लिंगमपल्ली से हटिया, नासिक से लखनऊ, अलूवा से भुब, नासिक से भोपाल, जयपुर से पटना और कोटा से हटिया तक 6 श्रमिक ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है।

 

ट्रेनों के संचालन के लिए गाइडलाइन : ट्रेनों से आवाजाही के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना जरूरी होगा। ट्रेनों को पहले सैनिटाइज किया जाएगा और हर किसी की स्क्रीनिंग होगी। घर पहुंचाने के बाद भी इनकी मेडिकल जांच की जाएगी और 14 दिन क्वारैंटाइन में रखा जाएगा। स्पेशल ट्रेनों से यात्रा करने वाले हर यात्री को अपना फेस जरूर कवर करना होगा। जिस स्टेशन से यात्रा शुरू की जाएगी, वहां की राज्य सरकार यात्रियों के लिए खाने और पानी की व्यवस्था करेगी। ट्रेनों का टिकट राज्य सरकार की ओर से नियुक्त किए गए नोडल अफसर को बल्क में दिया जाएगा। जिन लोगों को यात्रा के लिए चिह्नित किया जाएगा, उन्हें स्टेशन पर ही मास्क और सैनिटाइजर दिए जाएंगे।  यात्री नॉनएसी कोचेज में यात्रा करेंगे, हर कोच के एक सेगमेंट में 6 यात्री रहेंगे, आमतौर पर यहां 8 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है।

 

इससे पहले कल ही गृह मंत्रालय ने इनकी घर वापसी के लिए नई गाइडलाइंस जारी की थी, जिनमें कई तरह की छूट दी गई थी। प्रवासी मजदूरों, छात्रों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बसों से उनके घरों तक पहुंचाये जाने में आ रही दिक्कतों को देखने के बाद ट्रेनें चलाने का निर्णय हुआ है। पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्रियों ने कहा कि संक्रमण फैलने के डर से लाखों लोगों को बसों में लेकर आना मुश्किल है। इसमें काफी वक्त भी लग रहा है और यह केवल कम दूरी के लिए कारगर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री पीयूष गोयल और अन्य मंत्रालयों के साथ बैठक की। इसमें फंसे हुए लोगों को घर तक पहुंचाने की समस्या का हल निकालने को कहा। गृह मंत्रालय ने इस मामले पर फैसला ले लिया। रेल मंत्रालय ने इस संबंध में एक योजना बनाई है। इस योजना के तहत एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच प्वाइंट टू प्वाइंट ट्रेन संचालन होगा।

स्टेशन के बाहर ट्रेन में बैठने का इंतजार करते हुए मजदूर। डिस्टेन्सिंग और मास्क का पालन कड़ाई से कराया जा रहा है।

गृह मंत्रालय ने पहले बसों से इनकी वापसी सुनिश्चित करने का आदेश जारी किया था। अब ट्रेन के जरिये भी देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुये लोगों की आवाजाही के लिए निर्देश दिया है। राज्य सरकारें और रेल मंत्रालय ये आवाजाही सुनिश्चित करेंगे। रेलवे ने कहा है कि जिस राज्य से मजदूर घर के लिए रवाना होंगे, वहां की सरकार को उनकी जांच करनी होगी। एसिंप्टोमेटिक को ही यात्रा की इजाजत होगी। राज्य को मजदूरों को समूह में स्टेशन तक सैनिटाइज किये हुए बसों में लाना होगा।
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों, छात्रों, तीर्थयात्रियों और अन्य लोगों को अपने गृह राज्यों में जाने की अनुमति दे दी है। हालांकि तय नियम-कायदों के तहत ही इन लोगों को बसों के जरिये एक राज्य से दूसरे राज्य भेजे जाने को कहा गया था। लॉकडाउन में फंसे 1200 मजदूरों को लेकर तेलंगाना से झारखंड के लिए पहली स्पेशल ट्रेन आज यानी शुक्रवार को रवाना हो गई। लॉकडाउन में फंसे मजदूरों के लिए यह किसी बड़े राहत से कम नहीं है। हालांकि, आगे और कितनी ऐसी ट्रेनें चलेंगी, अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

तेलंगाना से झारखंड के लिये ट्रेन को रवाना करते रेलवे के अफसर।

रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि तेलंगाना से खुली इस स्पेशल ट्रेन के 24 डिब्बों में लगभग 1200 प्रवासी हैं। अधिक ट्रेनें चलाई जाएंगी या नहीं, इस पर निर्णय आज लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्रेन आज सुबह 4:50 बजे तेलंगाना के लिंगरपल्ली से खुली है, जो झारखंड के हटिया जा रही है।
तेलंगाना के बाद अब केरल के एर्नाकुलम से ओडिशा के लिए स्पेशल ट्रेन आज शाम रवाना होगी। इस स्पेशल ट्रेन में कुल 1200 प्रवासी श्रमिक होंगे जो कि अपने घर के लिए लौटेंगे। केरल सरकार में मंत्री वी एस सुनील कुमार ने यह जानकारी दी है। हालांकि अभी तक ट्रेन की टाइमिंग के बारे में जानकारी नहीं मिली है कि ट्रेन एर्नाकुलम से कितने बजे रवाना होगी।

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