केंद्र, राज्य के कर्ज में कमी लाने को कदम उठाए सरकार : उर्जित पटेल

  • 12 Jan, 2017
  • Amit Kumar

New Delhi : आम बजट से पहले भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने आज सरकार से केंद्र और राज्यों के ऊंचे ऋण को कम करने के लिए कदम उठाने को कहा है। उन्होंने कहा कि स्थिर वृहद आर्थिक स्थिति के लिए भारत को बेहतर नीतियों पर चलने की जरूरत है।

 पटेल ने यहां वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि मध्यम अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति लक्ष्य को चार प्रतिशत पर लाने को सुनिश्चित किया जाए। इसी के साथ उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति लाभ को त्वरित तरीके से आगे पहुंचाने के प्रयास करता रहेगा। साथ ही केंद्रीय बैंक चाहता है कि सरकार बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त पूंजी डाले।
पटेल ने कहा कि पिछले कुछ साल के दौरान वृहद आर्थिक स्थिरता का जो माहौल बना है उसे गंवाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का ऋण से जीडीपी का अनुपात देश की सॉवरेन रेटिंग को प्रभावित कर रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त राजकोषीय घाटा जी-20 के देशों में सबसे अधिक है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर का यह बयान वित्त वर्ष 2017-18 के आम बजट से करीब तीन सप्ताह पहले आया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को बजट पेश करेंगे। चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र और राज्यों के संयुक्त राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.4 प्रतिशत रखा गया है।
गवर्नर ने मुद्रास्फीति को निचले स्तर पर बनाये रखने पर जोर देते हुए कहा कि अर्थपूर्ण ब्याज दर ढांचे के लिए ऐसा होना जरूरी है। इससे बेहतर वृद्धि के लिए निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। पटेल ने कहा, ‘भारत में हमारे लिये बेहतर नीतिगत व्यवस्था रखना महत्वपूर्ण है। वृहद आर्थिक स्थिरता से अर्जित लाभों को गंवाना काफी आसान है, लेकिन इन्हें फिर से हासिल करना काफी धीमा तथा मुश्किल होता है।
पटेल ने इस बात का जिक्र किया कि केंद्रीय बैंक ने पहले ही चार प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य को अधिसूचित कर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को अंकुश में रखने के अलावा मौद्रिक नीति का लाभ सुगम तरीके से स्थानांतरित करने पर भी जोर दे रहा है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पुनर्पूंजीकरण समर्थन जारी रखने की वकालत करते हुए कहा कि एक बेहतर पूंजी वाली घरेलू बैंकिंग प्रणाली से विभिन्न अंशधारकों को विदेशी आईएफएससी में भी कारोबार करने में मदद मिलती है। गुजरात सरकार ने देश का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) यहां गिफ्ट सिटी में स्थापित किया है। यह दुनियाभर की कंपनियों को विश्वस्तरीय ढांचा, कनेक्टिविटी तथा प्रौद्योगिकी एक मंच पर उपलब्ध कराता है।
गिफ्ट सिटी में आईएफएससी संभवत: अपनी तरह का पहला केंद्र है जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद शुरू हुआ है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि रिजर्व बैंक पिछले कुछ साल से सभी आईएफएससी अंशधारकों के साथ विभिन्न विषयों पर काम कर रहा है, जिससे गिफ्ट सिटी का विकास किया जा सके। उन्होंने कहा कि आज हम प्रमुख आईएफएससी के बीच गहन प्रतिस्पर्धा देख रहे हैं जिससे वे अपनी कारोबारी क्षमता को बढ़ा सकें।
गवर्नर ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन विशेषरूप से रेलवे तथा शहरी एमआरटीएस में निवेश से लागत घटाने तथा उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे हम तेल आयात का बिल घटा सकते हैं साथ ही अपने शहरों में हवा की गुणवत्ता में भी सुधार ला सकते हैं।
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