ये है बॉलीवुड की मां निरूपा रॉय,फिल्मों में काम करने से खफा पिता ने मरते दम तक नहीं की थी बात

ये है बॉलीवुड की मां निरूपा रॉय,फिल्मों में काम करने से खफा पिता ने मरते दम तक नहीं की थी बात

By: Naina Srivastava
October 12, 15:10
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New Delhi: फिल्मी दुनिया में भले ही एक्टर और एक्ट्रेस का स्थान बेहद अहम होता है,लेकिन बॉलीवुड में सह-कलाकार यानि को-एक्टर की भूमिका का भी महत्वपूर्ण स्थान हैं। बिना सह कलाकार के अधिकतर हिन्दी फिल्में अधूरी लगती हैं। ऐसी ही एक अहम कलाकार के बारे में आज हम आपको बताएंगे जिन्हें अक्सर हिन्दी फिल्मों की “मां” भी कहा जाता है। जी हां- हम बात कर रहे हैं निरूपा रॉय की। महानायक अमिताभ के लिए तो इनका स्थान मां से भी बढ़कर रहा है। अमिताभ बच्चन की अधिकतर हिट फिल्मों में मां का किरदार इन्होंने ही निभाया है।

निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी, 1931 को गुजरात के बलसाड में एक निम्नमध्यम वर्ग गुजराती परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम कोकिला बेन था। निरूपा रॉय ने चौथी तक शिक्षा प्राप्त की थी। 15 साल की उम्र में ही निरूपा रॉय की शादी कमल राय से हो गई जो एक सरकारी कर्मचारी थे।निरूपा राय के पति फिल्मों के बेहद शौकीन थे और अभिनेता बनना चाहते थे। कमल राय अपनी पत्नी को लेकर बी एम व्यास से मिलने गए और अभिनेता बनने की पेशकश की, लेकिन बी एम व्यास ने साफ कह दिया कि उनका व्यक्तित्व अभिनेता के लायक नहीं है। लेकिन यदि वह चाहें तो उनकी पत्नी को फिल्म में अभिनेत्नी के रूप में काम मिल सकता है। फिल्म रनकदेवी में निरूपा रॉय को पहला मौका मिला।

एक बेहद निम्न परिवार से उभरकर फिल्मी पर्दे पर सफलता के कीर्तिमान स्थापित करने वाली निरूपा रॉय हमेशा से ही सादगी पसंद रहीं। आज के टीवी सीरियलों और फिल्मों में धार्मिक किरदार करने वाली अभिनेत्रियां फिल्मी पर्दे से बाहर बेहद आकर्षक जीवन जीती हैं जिसकी वजह से लोग जब उन्हें रीयल लाइफ के अलावा रील पर देखते हैं तो उनसे जुड़ नहीं पाते। लेकिन निरूपा रॉय का आम जीवन में भी बेहद सादगी से रहना उनके दर्शकों को उनसे फिल्मों के बाद भी जोड़ कर रखता था।

गुजराती फिल्म “रनकदेवी” के बाद उन्होंने हिन्दी फिल्म “अमर राज” भी की। 1953 में उनकी हिट फिल्म “दो बीघा जमीन” आई। इस फिल्म ने उन्हें हिन्दी सिनेमा की हिट हिरोइन के रूप में पहचान दी। फिल्मी पर्दे पर देवी मां का किरदार निभाने के कारण असल जिंदगी में भी उन्हें पर्दे के किरदार से जोड़ कर देखते थे। निरूपा रॉय अधिकतर अभिनेताओं की मां के रोल में नजर आने लगीं और यहीं से उनकी एक विशेष छवि बनी। बॉलीवुड की एक अवधारणा है कि यहां अगर आपके ऊपर धार्मिक फिल्में करने का टैग लग गया तो आपके लिए अन्य फिल्में करने के द्वार बंद हो जाते हैं। निरूपा रॉय के साथ भी बहुत हद तक ऐसा ही हुआ। हालांकि “मां” के किरदार में भी निरूपा रॉय ने सभी को चकित कर दिया।

निरूपा राय ने भी मां की भूमिका को निभाकर एक अलग अध्याय रचा। वे अमिताभ बच्चन के साथ अधिक फिल्में करने की वजह से उनकी मां के रूप में आज भी याद की जाती हैं। “दीवार” में उनकी भूमिका वाकई गजब थी। मां बेटे की यह जोड़ी इसके बाद जब भी पर्दे पर आई लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। रोटी, अनजाना, खून पसीना, सुहाग, इंकलाब, मुकद्दर का सिकंदर, मर्द आदि में उनकी भूमिका दमदार थी। 

बॉलीवुड में फिल्मी मां का किरदार निभाती निरूपा को असल जिंदगी में भी सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने मां का दर्जा दे रखा था। वे हर सुख-दुख में अमिताभ निरूपा रॉय का साथ देते नजर आए। निरुपा रॉय को आज भी हिन्दी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा माना जाता है। हिन्दी सिनेमा में मां के किरदार को जीवंत करने वाली इस महान अभिनेत्री की 13 अक्टूबर, 2004 को मौत हो गई। उन्हें आज भी बॉलीवुड की सबसे सर्वश्रेष्ठ मां माना जाता है।

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