जयपुर में पुलिस के डंडे ने बिगाड़ा माहौल, पुलिस और आम जनता में झड़प, शहर में कर्फ्यू

जयपुर में पुलिस के डंडे ने बिगाड़ा माहौल, पुलिस और आम जनता में झड़प, शहर में कर्फ्यू

By: Aryan Paul
September 09, 12:09
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New Delhi:

जयपुर के रामगंज इलाके में शुक्रवार को बाइक सवार कपल को कॉन्स्टेबल का डंडा लगने के कारण हिंसा भड़की। भीड़ ने 21 गाड़ियों में तोड़फोड़ की और 5 एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया। हिंसा में एक शख्स की मौत और 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।  

भीड़ ने पत्रकारों के साथ मारपीट की और कई पत्रकारों के कैमरे भी छीन लिए । पूरे शहर में इंटरनेट बैन कर दिया गया है।

दरअसल बता दें मामला कुछ यूं है कि रामगंज चौपड़ के पास सड़क किनारे लगे ठेलों को हटाने के लिए पुलिस पहुंची थी, रोड जाम होने की शिकायत पर पुलिस अतिक्रमण हटवाने के लिए गई थी। इसी दौरान साजिद नाम का शख्स अपनी पत्नी अरसी और बेटी के साथ बाइक से जा रहा था। उसका आरोप है पुलिसकर्मी का डंडा उसकी पत्नी और बेटी को लग गया। साजिद करीब रात 9 बजे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पहुंचा। तभी रामगंज थाने के सामने भीड़ इकट्टी होना शुरू हो गई और पथराव शुरू हो गया।

मामूली सा विवाद देखते-देखते बड़ी हिंसा में तब्दील हो गया, पुलिस ने भी कई जगह लाठी चार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई से नाराज लोगों ने रामगंज थाने को भी जलाने की कोशिश की, पुलिस ने किसी तरह आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को रोका । हिंसा में 8 पुलिसकर्मी घायल भी हो गए। पुलिस की फायरिंग में 1 शख्स की मौत हो गई, जबकि एक पुलिसकर्मी की हालत नाजुक है। हिंसा भड़कने के कारण कई जगहों पर कर्फ्यू लगा दिया गया है, और पूरे शहर में मामला शांत होने तक इंटरनेट पर बैन लगा दिया गया 

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। भीड़ ने पत्रकारों से मारपीट की और कैमरे छीन लिए। आरएसी की कंपनी, एसटीएफ, पुलिस जाप्ता, वज्र वाहन को इलाके में तैनात किया गया है। भास्कर के फोटोग्राफर अनिल शर्मा से मारपीट की गई और कैमरा छीन लिया गया। रामगंज, माणक चौक, सुभाष चौक और गलता गेट थाना इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इन इलाकों में शनिवार को स्कूल समेत दूसरे इंस्टीट्यूट बंद रहेंगे।

पुलिस की गलती थी, लेकिन साजिद को भी मामला वहीं शांत करना चाहिए था, फिर भी उसे शिकायत दर्ज करवानी थी, तो भीड़ कैसे इकट्ठा हो गई ? देखा जाए तो विवाद कुछ भी नहीं है, लेकिन जितना विकराल इसे बना दिया गया है। उससे जाहिर होता है कि भीड़ को जान-बूझकर उकसाया गया, क्योंकि पत्रकारों के साथ मारपीट और उनके कैमरे छीन लेना, बताता है कि हिंसा का मकसद साफ था ।

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