एक अंजान शायर,जिसके गीत आज भी लोगों के जुबां पर है,बॉलीवुड में जिसका नाम अदब से लिया जाता है

एक अंजान शायर,जिसके गीत आज भी लोगों के जुबां पर है,बॉलीवुड में जिसका नाम अदब से लिया जाता है

By: Naina Srivastava
September 12, 17:09
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New Delhi: 'खइके पान बनारस वाला', 'ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना' और 'रोते हुए आते हैं सब' जैसे न जाने कितने ही सदाबहार गीत लिखने वाले भारतीय हिंदी फिल्मों के गीतकार अंजान के लिखे हुए गीत आज भी लोगों की जुबां पर चढ़े हुए हैं। चलिए आपको बताते हैं ख्याति प्राप्त शायर अंजान की कुछ दिलचस्प बातें।

28 अक्टूबर, 1930 को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी बनारस में जन्में अंजान ने अपनी कलम से हिंदी सिनेमा में लोगों के बीच अपनी एक नई पहचान बनाई।  अंजान बचपन से ही शेरों शायरी की तरफ आकर्षित थे। उन्हें शायरी के प्रति बचपन से ही लगाव था। आपको बता दें कि अंजान का वास्तविक नाम 'लालजी पाण्डेय' था। अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गए उनके गीतों ने बॉलीवुड में धमाल मचा दिया। अंजान के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याणजी-आनंदजी का नाम सबसे ऊपर आता है। इनके संगीत निर्देशन में अंजान के गीतों को नई पहचान मिली थी। अंजान साहब के पुत्र समीर भी पिता के समान ही प्रसिद्ध गीतकार हैं। 

आपको बता दें कि अंजान ने बीएचयू से बी.कॉम की पढ़ाई की। अंजान एक ऐसे संगीतकार थे जिन्हें इंसानी अहसास का बखूबी अंदाजा था। उन्हें हिंदी सिनेमा के गीतों को भोजपुरी और पूर्वांचली भाषा की खुशबू से महकाने में महारत हासिल थी। अंजान के अल्फाज में ऐसी जादूगरी थे जो लोगों के दिल में वो हुकूमत कायम कर लेते थे। कहते हैं सफल इंसान के पीछे कोई ना कोई प्रेरणादायी कहानियां जुड़ी होती हैं, कुछ ऐसा ही बनारस के रहने वाले लाल जी पांडे यानी अंजान का गीतकार बनने से लेकर सक्सेस पाने तक रहा। अंजान को सफलता जिंदगी के बहुत ही पेचीदा मोड़ से होकर मिली है। 

अंजान की सफलता का दरवाजा उस वक्त खुला, जब उनसे गायक मुकेश की मुलाकात हुई। दरअसल हुआ यूं कि एक बार गायक मुकेश बनारस आए हुए थे। मुकेश वहां के मशहूर क्लार्क होटल में ठहरे थे। होटल के मालिक ने उनसे गअंजान की कविता एक बार सुनने की गुजारिश की। मुकेश ने जब कविता सुनी तो वह अंजान से काफी प्रभावित हुए, और उन्होंने अंजान को फिल्मों में गीत लिखने की सलाह दी। हालांकि, उस वक्त अस्थमा के रोग से जूझ रहे अंजान ने मुकेश की सलाह नहीं मानी। बीमारी की वजह से उन्हें बनारस के पुरसुकून और कुशगावर माहौल को छोड़कर मुंबई का रुख करना पड़ा। अंजान के बेटे गीतकार समीर ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि पापा से डॉक्टरों ने कहा कि अगर जिंदा रहना है तो आपको यह शहर छोड़ना होगा। 

अस्थमा बहुत बढ़ गया था और उनकी तकलीफ भी काफी बढ़ गई थी, तब डॉक्टरों ने उन्हें समुद्र तट जाने की सलाह दी थी। ड्राइ क्लाइमेट में रहेंगें तो बचने की संभावना बहुत कम रहेगी। इसके बाद अंजान मुंबई की ओर रुख कर लिए। जिंदगी को दोबारा शुरू किया। यहां आकर उन्होंने मुकेश से मुलाकात की। जिसके बाद मुकेश ने उन्हें निर्देशक प्रेमनाथ से मिलवाया, जो अपनी फिल्म के लिए किसी गीतकार की तलाश में थे। 

 पहली फिल्म मिलने के बाद भी शोहरत उन्हें काफी बाद में जाकर मिली। समीर बताते हैं कि सफलता की सारी ऊंचाईयों पर उन्हें डॉन ने पहुंचाया था।अंजान ने वैसे तो अपने समय के सभी दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया, लेकिन कल्याणजी-आनंदजी के साथ उनकी जोड़ी कमाल की रही। अंजान का अमिताभ बच्चन से एक खास रिश्ता बन गया था। उन्होंने अमिताभ की कई फिल्मों के लिए गाने लिखे। जिनमें डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, याराना, नमक हलाल और शराबी उनके करियर में मील का पत्थर रहीं। कलम के फन से सितारों की जगमगाती दुनिया में अंजान ने अपना एक ऐसा मुकाम बनाया, जिसकी ताजगी आज भी महसूस की जा सकती है। 

अंजान के लिखे यादगार गीतों में, 'ओ खाइके पान बनारस वाला, खुल जाए बंद अकल का ताला..., इंतहा हो गई इंतज़ार की,  आई ना कुछ खब़र, मेरे यार की..., गोरी हैं कलाईयां तू ला दे मुझे हरी हरी चूड़ियां..., मुझे नौ लखा मंगा दे रे ओ सैया दीवाने, तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना...,छू कर, मेरे मन को, किया तूने, क्या इशारा..., मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है..., जैसे बेहतरीन गीत हैं।

हिंदी सिनेमा को एक से एक नायाब गीत देने वाले इस गीतकार को अपने कुछ गीतों पर एतराज़ भी रहा। समीर कहते हैं, 'जब पापा ने डिस्को डांसर के गाने लिखे तो उन्होंने मुझसे कहा कि ऐसा लग रहा जैसे मैं अपने कलम के साथ दुष्कर्म कर रहा हूं। लोग ये कैसे-कैसे गाने लिखवा रहे हैं। 

इतना ही नहीं हिंदी सिनेमा को क्षेत्रियों बोलियों की महक से रू-बू-रू कराने वाले अजीम फनकार अंजान इस दुनिया से 13 सितंबर 1997 को अलविदा कह गए। गीतों के रुप में उनका बेशकीमती खजाना आज भी लोगों की जबान पर है।  इनके निधन से फिल्मी दुनिया का एक बड़ा सितारा डूब गया। आज भी उनके लिखे गीत दिल को हर कोई उन्हें गुनगुनाता है।

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