सालभर में 12000 Km तक करते हैं सफर, तो मत खरीदिए कार...इससे सस्ती पड़ेगी कैब

सालभर में 12000 Km तक करते हैं सफर, तो मत खरीदिए कार...इससे सस्ती पड़ेगी कैब

By: Naina Srivastava
August 09, 09:08
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New Delhi: हर रोज सफर के दौरान आपको  अपनी पर्सनल गाड़ी से सफर करना महंगा पड़ रहा है और आप सोच  रहे हैं  कि काश सस्ते में कोई सफर करा दे। तो हम आपकी इस समस्या  का समाधान लेकर आए हैं।

अगर आप सालभर में कार से 12,000 कि.मी. से कम की यात्रा करते हैं तो कार खरीदने से बेहतर है कि आप ऊबर, ओला का इस्तेमाल करें। ऐसा हम नहीं हाल ही में हुई एक स्डटी  कह रही है। इस नई स्टडी के दौराम जानकारी  मिली है कि अगर साल में 12,000 कि.मी. से कम सफर करना हो तो पर्सनल कार खरीदने में पैसे खर्च करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपको कैब सफर के  लिए सस्ता पड़ेगा।

वैसे भी जब कैब ऐग्रिगेटर कंपनियों ने पिछले दो सालों में ही अपने बेड़े को दोगुना कर दिया है। स्टडी में कहा गया है, 'भारतीय कारों की सालाना औसतन 12,000 कि.मी. ड्राइविंग पर कुल लागत प्रति कि.मी. 22 रुपए पड़ती है। पर्सनल कार तभी सस्ता पड़ सकता है जब साल में कम-से-कम 15,000 कि.मी. की यात्रा करनी हो।' 

ऊबर और ओला वाहनों का अपना-अपना बेड़ा बहुत तेजी से बढ़ा रहा है। अभी जिस रफ्तार से कारें बिक रही हैं, उसके मुताबिक साल 2020 तक बिकीं कारों का 20 प्रतिशत और 2030 तक बिकीं कारों का 30 प्रतिशत हिस्सा ऐग्रिगेटर सर्विसेज और रेग्युलर कैब के रूप में इस्तेमाल होगा। क्रिसिल रिसर्च के एक अध्ययन में यह पाया गया। एजेंसी का कहना है कि चूंकि कैब के रूप में कारों का भरपूर इस्तेमाल होता है, इसलिए साल 2030 तक कुल कारों की तादाद में 20 प्रतिशत की कटौती होगी। 

ऐग्रिगेटर सर्विसेज से किराए पर कैब लेने का प्रचलन बढ़ने की वजह से साल 2030 तक पैसेंजर कारों की सालाना बिक्री 1.5% तक गिर जाएगी। क्रिसिल का कहना है कि कैब पर्सनल कारों के मुकाबले ज्यादा ड्राइव की जाती हैं। मजेदार बात यह है कि ट्रांसपोर्टेशन में पर्सनल कारों की हिस्सेदारी टैक्सी और तिपहिया वाहनों से ज्यादा है क्योंकि लोग बेहतर सुविधा के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने के लिए तैयार हैं। इसी तरह, पहली बार कार खरीदते वक्त लोग उसकी ऊंची कीमत की भी परवाह नहीं करते। क्रिसिल रिसर्च की डायरेक्टर ने कहा, 'कन्ज्यूमर सर्वे में सामने आया है कि लोग किसी भी तरह पहली कार खरीद ही लेते हैं क्योंकि यह उनका सपना होता है, लेकिन दूसरी कार खरीदने में काफी टालमटोल होता है।'

क्रिसिल की डायरेक्टर ने कहा, 'कैब ऐग्रिगेटर सर्विसेज की तरफ बढ़ते झुकाव का बड़ा असर होगा। पर्सनल कार यूजर्स के मुकाबले कैब ओनर्स ज्यादा माइलेज देनेवाली कारों को कहीं तवज्जो देते हैं। इसका मतलब है कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।' उन्होंने कहा, 'वैसे भी, जब कारें सड़कों पर ज्यादा देर तक होंगी तो पार्किंग की समस्या भी कम होगी। अगर आप शेयरिंग कैब से सफर करते हैं तो इसकी लागत 11 रुपए प्रति कि.मी. आती है और वो घर तक आती हैं, एयर कंडीशन में ले जाती हैं। इतना ही नहीं, आपको ड्राइवर भी नहीं रखना पडता है।' 

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