भारत का एक ऐसा सिपाही जिसने सीने पर खाई थी 8 गोली, आज गुमनामी में जी रहा ये जांबाज सैनिक

भारत का एक ऐसा सिपाही जिसने सीने पर खाई थी 8 गोली, आज गुमनामी में जी रहा ये जांबाज सैनिक

By: Rohit Solanki
January 13, 22:01
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Varanasi : करीब 18 साल पहले India और Pakistan के बीच हुई कारगिल की जंग में शहीद हुए देश के वीर जवानों को 26 जनवरी के मौके पर देश एक बार फिर याद कर रहा है।

कारगिल विजय दिवस पर हम बात कर रहे हैं देश के उन वीर जांबांजों की जिन्होंने पाकिस्तानी सेना को घुटने पर आने के लिए मजबूर कर दिया था। ऐसे कई किस्से हैं जो आपको भारतीय सेना पर गर्व कराने के लिए काफी हैं, लेकिन कुछ योद्धा ऐसे भी हैं जो आज गुमनामी के अंधेरे में जी रहे हैं।

ऐसे ही एक जांबाज हैं कारगिल जंग के नायक आलिम अली। आज भी अपनी मूंछ पर ताव देते हुए अली कहते हैं कि मैंने जो किया देश के लिए किया। किसी पुरस्कार के लिए नहीं लेकिन अफसोस इस बात का है कि 18 साल बीत गए मगर सरकार की ओर से किए गए वादे पूरे नहीं हुए। वतन के लिए आठ-आठ गोलियां खाई लेकिन आज मैं गुमनामी की जिंदगी जीने को विवश हूं। बस, साल में एक बार 'जिंदा' हो जाता हूं जब सेना की ओर से कारगिल विजय दिवस के अवसर पर सम्मान मिलता है'।

चौबेपुर स्थित सरसौल गांव के आलिम अली वैसे तो कारगिल के शेर और पूरे गांव के हीरो हैं, लेकिन इस शहर और सरकार ने उन्हें भुला दिया है। गोलियां लगने के कारण एक पैर और एक हाथ ठीक से काम नहीं करता। सरकारी तंत्र से खफा आलिम ने काशी में कई जगह नौकरी की कोशिश की लेकिन हर दरवाजा बंद मिला। बताते हैं कि पेंशन के रूप में 21 हजार रुपए मिलते हैं। कभी-कभी समय से पहले पैसे खत्म हो जाते हैं।

इस बार तो बैंक ने बताया कि खाते में सिर्फ पांच हजार ही आए हैं, मेरे बाकी 16 हजार रुपए कहां गए कोई बताने वाला नहीं। इतनी दुश्वारियों के बाद भी आलिम का हौसला टूटा नहीं है। वो कहते हैं कि कुछ भी हो जाए, बेटे को सेना में अफसर बनाऊंगा। पेंशन के रुपए से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व घर का खर्च चलता है। आलिम की तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटा दानिश चंदौली से बीएससी की पढ़ाई कर रहा है।

सीने पर खाई थी दुश्मन की गोली : 22 ग्रेनेडियर के नायक आलिम अली 1990 में सेना में भर्ती हुए। जुलाई-92 से सितंबर--95 तक कश्मीर में चल रहे Operation Rakshak में शामिल थे। Pakistan जब कारगिल में घुसा तब सात जून-99 को उन्हें कारगिल में ल़़डने भेजा गया। आलिम ने अपने 25 साथियों के साथ कारगिल के युद्ध में हिस्सा लिया था और 21 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जुबार हिल पर साथियों के साथ तिरंगा फहराया था। पाकिस्तानी फौज से युद्ध के दौरान उन्हें सीने समेत शरीर के अन्य हिस्सों में आठ गोलियां लगी थीं।

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