पैसा नहीं, खाना नहीं : प्रवासी मजदूर बिहार-यूपी लौटने के लिये फिर से महाराष्ट्र की सड़कों पर उतरे

New Delhi : लॉकडाउन के बीच महाराष्ट्र के चंद्रपुर में करीब 1000 से अधिक प्रवासी मजदूर शनिवार को सड़कों पर उतर आये और उन्होंने मांग की कि उन्हें उनके घर वापस भेजने की व्यवस्था की जाये। इनमें से ज्यादातर भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना जिले के बल्लारपुर में सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई। एक हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक, जिनमें से अधिकतर सरकारी मेडिकल कॉलेज के एक निर्माण स्थल में रह रहे थे, सड़कों पर उतर आये और मांग की कि उनके गृह राज्यों में उनकी वापसी के लिए प्रबंध किये जायें। उन्होंने राजमार्ग को अवरूद्ध करने की कोशिश की और रेलवे स्टेशन की तरफ जाने लगे।

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अधिकारी ने कहा – श्रमिक उत्तर प्रदेश और बिहार में अपने-अपने घर लौटना चाहते थे। इनमें से कुछ पश्चिम बंगाल के भी हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के चलते उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनके आय के स्रोत बंद हो गये हैं। इसकी सूचना मिलने पर, रामनगर पुलिस थाने के कर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।
पुलिस ने श्रमिकों को बताया कि अगर वे अपने गृह राज्य लौटना चाहते हैं तो उन्हें उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा क्योंकि विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की जा रही है। उन्हें स्पेशल ट्रेन में जगह पाने के लिए आवेदन फॉर्म भरने होंगे। अधिकारी ने बताया कि उन्हें भोजन मुहैया कराया गया और बाद में श्रमिक अपने स्थानीय आवास पर लौट गये। राज्य सरकारों की मांग पर लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों, छात्रों और पर्यटकों के लिए सरकार ने शुक्रवार से स्पेशल ट्रेन शुरू किया है। राज्य सरकार की मांग के मुताबिक रेलवे स्पेशल ट्रेन खोल रहा है और मजदूरों की घर वापसी कर रहा है। इससे पहले बांद्रा रेलवे स्टेशन पर बीते दिनों प्रवासी मजदूरों का जनसैलाब उमड़ा था।

महाराष्ट्र में जैसे जैसे केस बढ़ रहे हैं वैसे वैसे सतर्कता बढ़ती जा रही है।

ये सभी सरकार से घर वापस भेजे जाने की मांग कर रहे थे। हालांकि, एक अफवाह फैलने की वजह से इतनी बड़ी संख्या में लोग स्टेशन पर जमा हो गए थे। सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाह फैली थी कि सरकार प्रवासी मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेन खोल रही है। मजदूरों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करनी पड़ी थी।

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