डोकलाम: आधी रात हुई थी भारत-चीन के बीच मीटिंग और फिर 3 घंटे में निकला 73 दिन के विवाद का हल

डोकलाम: आधी रात हुई थी भारत-चीन के बीच मीटिंग और फिर 3 घंटे में निकला 73 दिन के विवाद का हल

By: Rohit Solanki
September 09, 17:09
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New Delhi: भारत और चीन के बीच करीब ढाई महीने तक तनातनी का कारण बने रहे डोकलाम विवाद का हल मात्र तीन घंटे की बैठक में निकला था. ये बैठक रात 2 बजे हुए थी. इस विवाद को हल करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग  के अलावा दोनों तरफ के अधिकारियों ने बड़ी भूमिका अदा की. दोनों देशों के बीच इस बातचीत का ही नतीजा था कि बार बार उकसावे वाले बयान देने वाला चीन आखिरकार डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर मजबूर हो गया. वैसे भी भारत शुरुआत से ही डोकलाम विवाद को बातचीत के जरिये हल किए जाने की बात कह रहा था. लेकिन चीन ही बार बार अपना अढि़यल रुख अपनाए हुए था.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि डोकलाम को लेकर चल रहे तनाव को खत्म करने में PM नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सक्रिय भूमिका रही. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में भारत के राजदूत विजय गोखले को 27 अगस्त की शाम को बीजिंग ने बताया कि वह उनसे जल्द मुलाकात करने को लेकर उत्सुक है. गोखले उस वक्त हॉन्गकॉन्ग में थे. उन्‍होंने कहा कि वह हॉन्गकॉन्ग में हैं. वह आधी रात को पेइचिंग पहुंच सकते हैं. इस पर चीन की ओर से उनसे जल्द से जल्‍द पेइचिंग पहुंचने के लिए कहा गया. गतिरोध खत्म करने की कोशिश की दिशा में चीन की ओर से पहला गंभीर संकेत था.

उसी रात 2 बजे जब गोखले डोकलाम विवाद को हल करने के लिए चीन के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मीटिंग के लिए बैठे.  दोनों पक्षों को स्वीकार्य हल तक पहुंचने में 3 घंटे का वक्त लगा. अगले दिन दोनों सरकारों दोनों देशों के बीच सबसे बुरे और लंबे वक्त तक चले गतिरोध को खत्म करने का ऐलान कर दिया.मामले से जुड़े सरकारी अधिकारी ने बताया, 'दोनों नेता इस बात पर सहमत थे कि दोनों ही पक्षों के पास साझेदारी के जरिए बहुत कुछ हासिल करने के मौके हैं. यही वह बात थी, जिसने दोनों पक्षों को गतिरोध खत्म करने के लिए आधार रखा.'

दोनों देशों के बीच 73 दिनों तक चला गतिरोध आखिरकार खत्म हुआ. मोदी यह नहीं चाहते थे कि विवाद दोनों देशों के बीच युद्ध का रूप ले. बीजेपी को भी संयम बरतने का संदेश दिया.  पार्टी के साथ-साथ संघ परिवार से जुड़े संगठनों के लोग भी डोकलाम गतिरोध पर चुप्पी साधे रहे. यहां तक कि चीन के सरकारी मीडिया की तरफ से भड़काऊ बयानों पर भी उस तरह की शाब्दिक प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली.

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