भारत-बलूचिस्तान का 'रक्षा-बंधन'... बलोच बहनें सजाएंगी भारतीय भाइयों की कलाई

भारत-बलूचिस्तान का 'रक्षा-बंधन'... बलोच बहनें सजाएंगी भारतीय भाइयों की कलाई

By: Sachin
August 06, 14:08
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New Delhi: बलूचिस्तान की जनता पाकिस्तान के कब्जे से आजाद होने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही है। जाहिर है उसे इसके लिए विश्वभर के समर्थन की जरूरत है। खासतौर से भारत से वह इस मामले में पूरी मदद की आस लगाए है। 

भारत सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान की आजादी के संघर्ष और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति भरपूर समर्थन दिए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद बलोचवासियों की मदद और समर्थन के लिए ‘हिन्द बलोच फोरम’का गठन किया गया। अब बलोच बहनें रक्षाबंधन के अवसर पर सोमवार को इस फोरम के पदाधिकारियों और भारतीय नागरिकों को राखी बांधकर अपने देश और समुदाय के लिए न केवल मदद का भरोसा लेंगी, बल्कि भारत के साथ रिश्ते को भी नया आयाम देंगी।

बलोच बहनों का यह दल प्रो। नायला कादरी के नेतृत्व में आ रहा है। कार्यक्रम दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब के उपसभापति हॉल में सोमवार को सुबह 11 बजे से होगा। गौरतलब है कि ‘हिन्द बलोच फोरम’ ने बलोच बहनों को प्रधानमंत्री मिलवाने के लिए भी समय मांगा है। इस कार्यक्रम के बाद भोपाल, लखनऊ, गाज़ियाबाद, जम्मू एवं कश्मीर में भी बलोच समाज के लिए जागरुकता सभाएं आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य बलोच समुदाय के लिए समर्थन जुटाना और भारतीयों को पाक-चीन के खतरनाक इरादों से परिचित कराना है।

आपको बता दें कि कि अध्यक्ष गुरु पवन सिन्हा के नेतृत्व में ‘हिन्द बलोच फोरम’ लगातार बैठकें कर रहा है और बलोच समुदाय के लिए समर्थन जुटा रहा है। फोरम को मिल रहे समर्थन का असर भी दिखने लगा है। बड़ी संख्या में बलोचवासी इससे जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए पाकिस्तानी मीडिया ने इस फोरम के गठन को भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान को तोड़ने की साजिश करार दिया है। पाक मीडिया में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, पवन सिन्हा व कुलभूषण जाधव के नाम उछाले जा रहे हैं। फोरम के निर्देशक मंडल में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, बलोच नेता प्रो। नायला कादरी बलोच, कर्नल आरएसएन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र शामिल हैं।

क्या है बलूचिस्तान की कहानी...

बलूचिस्तान के इतिहास पर नजर डालें, तो 1 अप्रैल 1948 से यानि जब से पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को फौजी कार्यवाही करके कब्जाया था, तभी से वहां मानवाधिकारों का हनन जारी है। वहां से आए दिन पाक सेना के अत्याचार की खबरें आती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 10 वर्षों में बलोच प्रांत के 30 हजार से ज्यादा बच्चे, महिलाएं और पुरुष लापता हो चुके हैं, वहीं पाकिस्तानी सेना ने 20000 से अधिक लोगों को अवैध रूप से कैद किया हुआ है। भारत के अनेक मराठा परिवार वहां के समाज का हिस्सा है और लगभग 5 लाख बलोच भारत मैं रहते हैं।

पाकिस्तान की नजर बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा पर है। वहां सोना, तांबा व गैस के अकूत भंडार हैं और पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर इनका दोहन कर रहा हैं। गौरतलब है कि चीन ने इस क्षेत्र में CPEC सड़क मार्ग बनाया है। इस कॉरिडोर से जहां एक ओर चीन बलूचिस्तान की अकूत प्राकृतिक संपदा का दोहन कर सकता है वहीं सामरिक दृष्टि से भारत की उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर भी अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रख सकता है जो भारत के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

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