रोड एक्सिडेंट में तड़पते लोगों की 20 साल से जान बचा रहा ये दंपत्ति, लोग कहते हैं भगवान का रूप

रोड एक्सिडेंट में तड़पते लोगों की 20 साल से जान बचा रहा ये दंपत्ति, लोग कहते हैं भगवान का रूप

By: Rohit Solanki
January 12, 22:01
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New Delhi: हमारे देश में हर साल सैकड़ों लोगों की मौत सिर्फ सड़क हादसों के कारण होती है। इन मौतों का सबसे बड़ा कारण तो लापरवाही है, लेकिन समय से इलाज न मिलना भी दूसरा सबसे बड़ा कारण है।

अक्सर देखा गया है कि सड़क हादसे के बाद कई बार समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे पीड़ित की मौत हो जाती है। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे दंपत्ति के बारे में जो अब तक सड़क हादसे में घायल सैकड़ों लोगों की जान बचाकर उनके परिवार के लिए भगवान बन गए हैं।

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अपनी पत्नी ट्विंकल के साथ हिमांशु कालिया

हम बात कर रहे हैं दिल्ली के हिमांशु कालिया और उनकी पत्नी ट्विंकल कालिया के बारे में। हिमांशु कालिया का बस एक ही सपना है कि सड़क हादसे में घायल पिता को सड़क से उठाकर अस्पताल पहुंचाने का जो उनका बुरा अनुभव था वैसा किसी और को न मिले। हिमांशु बताते हैं कि सत्रह साल की उम्र में पिताजी का एक्सीडेंट हुआ। समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंची... लोगों से मदद मांगी पर किसी ने मदद नहीं की। जैसे-तैसे पिता को अस्पताल लेकर आया, लेकिन समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारण वो कोमा में चले गए और कुछ साल बाद दुनिया को अलविदा कह गए।

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एक घायल की मदद करते ट्विंकल और हिमांशु कालिया

बस उसी दिन से 17 साल के हिमांशु ने ठान लिया कि आम लोगों की इस मुश्किल को आसान करना ही उनके जीवन का लक्ष्य है। पिछले 20 सालों से हिमांशु बिना किसी पैसे के एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। लोग अब उनको एंबुलेंस मैन कहने लगे हैं। हिमांशु अपनी शादी का एक बेहद रोचक किस्सा बताते हैं।

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घर में ही बना रखा है कंट्रोल रूम

उनके मुताबिक, मेरा रिश्ता हुआ और फिर शादी। पत्नी को मेरे इस काम के बारे में पता था... इसलिए वो मायके से एंबुलेंस लेकर आई। अब हिमांशु की पत्नी ट्विंकल ने भी एम्बुलेंस चलाना सीख लिया है। जब ड्राइवर की कमी होती है तब वे खुद ही गरीब जरूरतमंद लोगों को अस्पताल पहुंचने का काम करती हैं। पुलिस से लेकर अन्य निजी एम्बुलेंस सेवा में काम करने वालों और झुग्गियों में रहने वालों को हिमांशु ने अपना टेलीफ़ोन नंबर दे दिया है ताकि जिसे भी जरूरत हो वह एम्बुलेंस के लिए उन्हें फ़ोन कर सके।

हिमांशु को अपने इस सेवा मिशन के लिए हर महीने करीब 2 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इंश्योरेंस एजेंट के काम से जो कमाई होती है वह उसे अपने इसी मिशन पर खर्च कर देते हैं। हिमांशु और ट्विंकल को अपने इस मिशन में ख़ुशी तो बहुत मिलती है पर चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कई बार बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में देरी हो जाती है पर वे एम्बुलेंस ड्राइवरों को सैलरी देने में कभी देर नहीं करते। ट्विंकल बताती हैं कि कई बार वे अपने छोटे बच्चों को घर में छोड़कर जरूरतमंद लोगों को अस्पताल पहुंचने चली जाती हैं।

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खुद घायलों की मदद करने निकल जाती हैं ट्विंकल

ट्विंकल ने बताया कि कई बार घायल लोगों को उठाने और एम्बुलेंस से उतारने के लिए भी लोग आगे नहीं आते। एक वाकये का जिक्र करते हुए ट्विंकल कालिया याद करती हैं कि कैसे एक बार जब वे सड़क हादसे में घायल एक किशोर लड़के को अस्पताल लेकर पहुंचीं तो कई मिन्नतों के बाद ही लोग उसे एम्बुलेंस से उतारने को तैयार हुए। जब वह लड़का ठीक हुआ तो वह अपने माता-पिता के साथ कालिया परिवार से मिलने आया। पिता ने ट्विंकल की तरफ इशारा करते हुआ कहा कि बेटा ये तुम्हारी दूसरी मां हैं। हमने तो तुम्हें जन्म दिया पर इन्होंने तुम्हे जीवन दिया।

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