दुश्मन के लिए सबसे बड़ी परेशानी है ब्रह्मोस की रफ्तार, इसे रोकने का किसी में नहीं है दम

दुश्मन के लिए सबसे बड़ी परेशानी है ब्रह्मोस की रफ्तार, इसे रोकने का किसी में नहीं है दम

By: Rohit Solanki
January 13, 22:01
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New Delhi : वायुसेना की ताकत को चार गुना करने के लिये ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का पिछले दिनों सफलता पूर्वक कर परीक्षण किया था। ये मिसान न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि चीन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। दरअसल भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई ब्रह्मोस मिसाइल ने चीन और पाकिस्तान को परेशान कर रखा है, क्योंकि इसकी रफ्तार रोकना दुनिया के किसी भी देश के बस में नहीं है। यह हाइपरसोनिक मिसाइल अगर एक बार लांच हो गई, तो लक्ष्य को बर्बाद करके ही रुकती है।

पिछले दिनों भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रह्मोस मिसाइल का सुखोई लड़ाकू विमान में लोड कर उड़ान भरी थी और फिर सफलतापूर्वक उसका सुखोई विमान से परीक्षण भी किया था। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज हाइपरसोनिक मिसाइल है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी इस मिसाइल का वजन, लेकिन सुखोई जैसा ताकतवर विमान इसे लेकर अासानी से उड़ गया। जल्द ही ब्रह्मोस को वायुसेना में औपचारिक तौर पर शामिल किया जाएगा। इसके बाद कोई भी दुश्मन इसके सामने नहीं टिक पायेगा। इस मिसाइल की मारक क्षमता इससे सबसे खास बनाती है।

आपको बता दें कि जून में सुखोई फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण किया गया जो सफल रहा। इसके बाद साल के अंत में ब्रह्मोस मिसाइल का सुखोई से सफल परीक्षण किया गया और इसने अपने टारगेट को बर्बाद कर दिया। भारत अब उन चंद देशों में शामिल हो गया है, जो जेट से अत्याधुनिक और सटीक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दाग सकते हैं। 

 रक्षा सूत्रों के अनुसार सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान जल्द ही हथियारों से लैस हो जाएगा। 

वायुसेना में औपचारिक तौर पर ब्रह्मोस के शामिल होते ही यह हथियार विश्व का पहला हथियार होगा जो पानी, हवा और जमीन तीनों जगह से मार करने में सक्षम हो। ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस ने मिलकर बनाया है और यह 300 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है। 

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