देश में बढ़ रही इनफेक्शन से होने वाली बीमारियां, चीन के मुकाबले भारत में ज्यादा खतरा-रिपोर्ट

देश में बढ़ रही इनफेक्शन से होने वाली बीमारियां, चीन के मुकाबले भारत में ज्यादा खतरा-रिपोर्ट

By: Aryan Paul
November 15, 11:11
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New Delhi: एक रिपोर्ट के मुताबिक, INDIA में Lifestyle diseases बढ़ती जा रही है। ठीक वैसे ही जैसे हार्ट और पुरानी सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। वैसे ही communicable diseases बढ़ती जा रही है। आपको बताते हैं कैसे?

मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि दस्त और तपेदिक जैसी बीमारियों की तरह ही है। संक्रामक रोग। जो कि ना सिर्फ बड़े शहरों में बल्कि पिछड़े राज्यों में भी पहुंच चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी राज्यों ने इस प्रकार की बीमारी महामारी संक्रमण कहलाती है। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भारत के सभी राज्यों में फैल चुकी है। जिसे महामारी संक्रामक रोग का नाम दिया गया है। जहां पर ये बीमारी कई अलग-अलग तरह से फैलती है।  कुछ मामलों में इनमें 1986 में शुरूआती परिवर्तन हुआ था, तो कुछ में 2010 के बाद बदलाव आया था । रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण फैलने के पहले ग्रुप के राज्यों में केरला, तमिलनाडू, गोवा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे अग्रणी राज्य शामिल थे।

दूसरे ग्रुप में काफी बड़ी संख्या में लोग इससे अफेक्टेड थे। जिनकी संख्या 588 मिलियन तक बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 में बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश, छत्तसीगढ़, झारखंड, राजस्थान और ओडिशा जैसे पिछड़े राज्य भी शामिल हैं, जहां इन डिजीज की संख्या काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 1990 से 2016 तक इन बिमारियों का जो आंकड़ा मिला है, वो भारत में कुल बिमारियों का अकेला ही दो तिहाई के बराबर है।

क्योंकि ये मामला सीधे तौर पर विकास से जुड़ा हुआ है। अकेली कुपोषण समस्या ही भारत की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि 1990 के बाद से बाल और मातृ कुपोषण जैसी बीमारियों में काफी कमी आई हैं, तो दूसरी ओर अभी भी ये बीमारियां भारत की कुल बीमारियों का अकेले ही 15% है। साथ ही यह भी बताया गया है कि ये दोनों बीमारियां 2016 तक चीन के मुकाबले देश में 12 बार सबसे ज्यादा बड़ी बीमारियों के तौर पर उभर चुकी हैं।  


केरल के बारे में कहा गया है कि वहां पर देश के मुकाबले इसकी संख्या काफी कम है। इन डिजीज से लड़ने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ने इनेशिएटिव लिया है।

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