घरों में बर्तन धोती है मां, बेटा हरियाणा का गौरव : बोला- इंजीनियर बन मां-बाप की जिंदगी बदल दूंगा

New Delhi : हरियाणा के लाल ने कमाल कर दिया है। गुरुग्राम के चकाचौंध के बीच गंदी बस्ती में रहनेवाले गौरव ने अपने इलाके को अपनी उपलब्धियों से चकाचौंध कर दिया है। उसकी मां घरों के बर्तन धोती है और पिता बढई का काम करते हैं। तंगहाली ऐसी कि पढ़ने के लिये भी पूरी किताबें नहीं। लेकिन गौरव के सामने ये सारी बाधाएं बहुत छोटी साबित हुईं। गौरव ने मैट्रिक में जिले में टॉप किया है।

सेक्टर-9 अम्बेडकर निवासी गौरव ने 495 अंक प्राप्त कर जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। गौरव सेक्टर 4-7 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का छात्र है। उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। अभाव की वजह से ट्यूशन भी नहीं कर सका। पिता सुरेश राना बढ़ई का काम करते हैं तो मां शांति दूसरों के घरों में बर्तन धोती है। मां की यही स्थिति गौरव से सही नहीं जाती है। अपनी मां को अच्छा जीवन देने के लिये गौरव ने दिन रात एक कर पढ़ाई की और जिले में टॉप किया है। जब भी उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता तो वह सिर्फ एक बार अपनी मां की तरफ देखते और फिर पढ़ने बैठते।

गौरव बताते हैं – दसवीं की परीक्षा से पहले ही उनके पिता सुरेश राना का एक्सीडेंट हो गया था। स्थिति इतनी खराब हुई कि घर में पढ़ाई छोड़ने की बातें उठने लगी लेकिन पिता ने अपने बेटे की काबीलियत को समझा और स्कूल जाने दिया। बेटे गौरव ने भी पिता का नाम आगे किया।
गौरव ने बताया – वह इंजीनियर बनना चाहता है। वह घर की आर्थिक स्थिति को ठीक करना चाहता है।
घर की दशा को देखते हुये दसवीं कर लेना ही एक सपने की तरह था वहीं जिले को टॉप कर लेना बहुत कुछ हासिल करने के बराबर है। गौरव ने अपनी सफलता का राज बताते हुये कहा – वह हार्ड वर्क से ज्यादा स्मार्ट वर्क में विश्वास करते हैं। वह कामों को विभाजित करते हैं। रात में नींद नहीं आये उसके लिए सबसे रुचि का विषय रात को पढ़ते हैं। वहीं कम रुचि का विषय दिन में या कक्षा में पढ़ते हैं।
वह स्कूल से तीन बजे आने के बाद चार बजे से छह बजे तक घर पर पढ़ता फिर रात को नौ बजे से बारह बजे तक पढ़ता। सुबह घर में मां की मदद करने के साथ में पढ़ाई करता था। गौरव को 500 में 495 अंक मिले। उसे अंग्रेजी में 99, गणित में 100, सामाजिक विज्ञान में 98, विज्ञान में  99 और संस्कृत में 99 अंक मिले हैं।

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