अजीब और रहस्‍यमयी है ये मंदिर, पेड़ के भीतर विराजतें हैं यहां शिव...

अजीब और रहस्‍यमयी है ये मंदिर, पेड़ के भीतर विराजतें हैं यहां शिव...

By: Rohit Solanki
December 07, 22:12
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NEW DELHI: Sanatan dharm में वृक्षों का महत्‍व किसी से छिपा नही है। पीपल, बरगद आदि वृक्ष लोकआस्‍था से तो जुड़े ही हैं साथ ही इनके लिए कई रहस्‍यों से भरी कथाएं भी जनमानस में प्रचलित हैं।   बरगद और पीपल के दो विशाल वृक्षों की खासियत यह है कि इसके तनों के भीतर मौजूद है भगवान शिव का मंदिर। सिर्फ इतना ही नहीं इन दोनों प्राचीन वृक्षों की टहनियां आश्‍चर्यजनक रूप से शिव के धनुष, त्रिशूल, डमरू और गले का हार यानि सर्प का आभास दिलाती हैं।

अदभुत्, आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय। इस दो वृक्षों के बारे में जानकर आप भी चकित रह जाएंगे। लोकआस्‍था है कि इन दो वृक्षों के भीतर बने मंदिर में साक्षात देवाधिदेव शिव का निवास है। इस दोनों पेड़ों की टहनियां महादेव का डमरू हैं तो शाखाएं त्रिशूल, यही नहीं टहनियों से ही भगवान् गणेश और नाग देवता भी बने हुए हैं।

अत्‍यंत प्राचीन हैं ये दोनों वृक्ष 

पश्‍चिमी चंपारण जिले के बगहा में हजारों साल पुराने इन दोनों वृक्षों की वास्‍तविक आयु किसी को भी ज्ञात नहीं है। आश्‍चर्य की बात यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सबसे पहले इन दोनों वृक्षों की जड़ों से निर्मित प्रणवमंत्र ॐ के आकार के दर्शन होते हैं। 

 जड़ों में ही है शिवधाम का प्रवेशद्वार 

जैसे-जैसे श्रद्धालु इन दोनों जुड़े हुए वृक्षों के पास पहुंचते हैं उनके आश्‍चर्य का ठिकाना नहीं होता क्‍योंकि इनके भीतर ही मौजूद है शिव का अति प्राचीन मंदिर। जी हां, वृक्ष के भीतर शिव का मंदिर। और तो और इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए भक्‍तों को वृक्ष के जड़ों में से प्रवेश करना होता है। 

एक योगी की समाधि, ईंट पत्‍थर बन गये वृक्ष रूपी मंदिर 

स्‍थानीय लोगों की मानें तो किसी जमाने में यहां श्रीयोगी हरिनाथ बाबा तप किया करते थे और यहीं पर उन्‍होंने जिंदा समाधी ली थी। समाधी के उपरांत जब श्रीयोगी के उत्तराधिकारी उमागिरि नाथ इस स्‍थान पर मंदिर का निर्माण कराने लगे तो कई आश्‍चर्यजनक घटनाएं घटने लगीं। 

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