पूर्व सांसद राशिद मसूद की रसम पगड़ी में वैदिक मंत्रोच्चार होते ही मौलाना भागे, कहा- धर्म भ्रष्ट हो गया

New Delhi : कांग्रेस के पूर्व सांसद राशिद मसूद के घर पर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने रसम पगड़ी के आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व सांसद राशिद मसूद कोरोना महामारी की चपेट में आ गये और 5 अक्टूबर को रुड़की में उनका देहावसान हो गया। इसके बाद 11 अक्टूबर रविवार को सहारनपुर जिले के बिलासपुर गाँव में रसम पगड़ी की रस्म करने के लिये एक व्यापक आयोजन हुआ। इस दौरान ब्राह्मण पंडितों ने वैदिक मंत्रों का जाप किया। जैसे ही समारोह वैदिक मंत्रों का जाप शुरू हुआ कई मौलाना जो वहां उपस्थित थे तम्मिला उठकर चले गये।

इस आयोजन को लेकर मौलाना असद क़ासमी ने कहा कि पगड़ी बांधना और परिवार के सबसे बड़े सदस्य को घर के मुखिया के रूप में चुनना एक अच्छी परंपरा है। लेकिन राशिद मसूद जी के यहां यह इस्लामिक परंपरा के अनुसार होना चाहिए था न कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार। जब रसम पगड़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था, तो मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इसपर कड़ा विरोध जताया था।
इस रस्मी आयोजन में परिवार के बुजुर्गों ने साजन मसूद को पगड़ी बांधी। समारोह में रिश्तेदार और समर्थक भी मौजूद थे। जब मौलानाओं और कट्टरपंथियों ने इसका विरोध किया, तो परिवार ने उनकी बिल्कुल भी नहीं सुनी। साजन ने कहा कि यह एक पुरानी परंपरा है। उन्होंने कहा कि उनके दादा और चाचा के गुजर जाने के बाद भी भी उनके हिंदू दोस्तों ने रसम पगड़ी का आयोजन किया था।
उन्होंने कहा कि उनके पिता का पूरा जीवन हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा, “हमने इस समारोह के माध्यम से उन लोगों की भावनाओं की सराहना की जो मेरे पिता को श्रद्धांजलि देना चाहते थे।” उन्होंने कहा कि किसी को भी इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस्लाम सभी धर्मों का सम्मान करता है।

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