रोहिंग्या पर SC में सुनवाई टली, कहा-सुरक्षा जरूरी लेकिन महिला-बच्चों की अनदेखी नहीं कर सकते

रोहिंग्या पर SC में सुनवाई टली, कहा-सुरक्षा जरूरी लेकिन महिला-बच्चों की अनदेखी नहीं कर सकते

By: Rohit Solanki
October 13, 15:10
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New Delhi: भारत में रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने या वापस भेजने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई 21 नवंबर तक टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी पक्षों को अगली चर्चा के लिए अपने तर्क तैयार करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि हम मानवीय मूल्यों को संविधान का आधार मानते हैं। देश की सुरक्षा हमारा पहला कर्तव्य है, लेकिन हम महिलाओं और बच्चों की अनदेखी भी नहीं कर सकते।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई तक रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने का फैसला न ले। आपको बता दें कि रोहिंग्या शरणार्थियों ने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उन्हें भारत से वापस भेजने को कहा गया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा सहित तीन जजों की बेंच रोहिंग्या शरणार्थियों की याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

 चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं। बेंच ने कहा है कि वह इस मामले में अलग-अलग पहलुओं पर सुनवाई करेगी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है कि यह मामला कार्यपालिका का है और सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप न करे। 

सरकार ने अपने हलफनामे में रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि ये भारत में नहीं रह सकते। सरकार ने कहा है कि उसे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ रोहिंग्या आतंकी संगठनों के प्रभाव में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं, बल्कि कानूनी बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए। 

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