एक कुली की वजह से नाकाम हुई चीन की चाल, 19 घंटे पैदल चल भारतीय सैनिकों को देख भागे थे चीनी

एक कुली की वजह से नाकाम हुई चीन की चाल, 19 घंटे पैदल चल भारतीय सैनिकों को देख भागे थे चीनी

By: Rohit Solanki
January 13, 15:01
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New Delhi: डोकलाम विवाद के बाद अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग इलाके में हाल ही में चीन ने एक बार फिर घुसपैठ की थी।

हालांकि, भारतीय सेना के वहां पहुंचते ही चीनी दल वहां से भाग खड़ा हुआ। ये कहानी तो ज्यादातर लोग जानते हैं, पर असली कहानी जानकर आपको अपने भारतीय होने पर गर्व का एहसास होगा। दरअसल, चीन की इस नापाक चाल पर पानी फेरने वाली भारतीय सेना नहीं बल्कि एक आम नागरिक था। जी हां, कुली का काम करने वाले एक व्यक्ति ने सेना को चीन की घुसपैठ की खबर दी थी।

भारतीय सेना को देख अपना सारा सामान छोड़ गई थी चीन की सड़क बनाने वाली टुकड़ी

28 दिसंबर को जब इस कुली ने चीनी दल को सबसे पहले देखा और सेना को खबर दी। खबर मिलते ही सेना की टुकड़ी बेस कैंप से मैकमोहन लाइन यानि भारत-चीन सीमा की तरफ रवाना हुई। भारतीय सैनिक 19 घंटे पैदल चलकर मौके पर पहुंचे थे। भारतीय सैनिकों को देख चीन का सड़क बनाने वाला दल अपना सारा सामान छोड़कर वहां से भाग खड़े हुए। आपको बता दें कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में सड़क नहीं होने की वजह से भारतीय सैनिकों को पैदल घुसपैठ स्थल तक पहुंचना पड़ा और इसमें 19 घंटे लग गए। 

सीमा की तरफ एक महीने का राशन लेकर रवाना हुए थे 120 जवान

सेना की तरफ से 120 जवान राशन के साथ सीमा पर भेजे गए ताकि वे वहां पर करीब एक महीने तक आसानी से रह सकें। सीमा पर सड़क नहीं होने और खच्चर आदि की सुविधा न होने की वजह से भारतीय सेना को अपने 300 पोर्टर लगाने पड़े जिससे सैनिकों के लिए राशन वहां पहुंचाया जा सके। एक रक्षा सूत्र ने कहा, 'शुरू में ऐसा लगा कि चीनी सेना डोकलाम के बाद विवाद का एक और मोर्चा खोलना चाहती है। हमें यह विश्वास था कि वहां पर लंबे समय तक रुकना पड़ सकता है। डोकलाम विवाद से सबक लेते हुए हमने 28 दिसंबर को ही घुसपैठ स्थल के लिए सैनिकों को रवाना कर दिया।' 

19 घंटे पैदल चलने के बाद सीमा पर पहुंचे थे भारतीय सैनिक

उन्होंने बताया कि दूसरी तरफ 6 जनवरी को फ्लैग मीटिंग के लिए आए चीनी सैनिक सीमा तक अपने वाहन से आए थे। मामला तत्काल सुलझ गया और चीन के सैनिक सड़क बनाने वाली अपनी मशीनों के साथ वापस लौट गए। हालांकि उनके उपकरणों को स्थानीय लोगों ने नुकसान पहुंचा दिया था। सूत्र ने बताया कि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद चीन के सिविलियन वर्कर अपने उपकरण छोड़कर भाग गए। उन्होंने कहा, 'लेकिन अगर वे बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों के साथ वापस आते तो क्या होता। इसी आशंका को देखते हुए हमने सबसे पहले रक्षात्मक उपाय किए लेकिन हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संसाधनों को जमा करना था। हालांकि इसमें भी चुनौतियां और कठिनाइयां थीं।' 

पोर्टर के आने से पहले सेना ने हेलिकॉप्टर से 100 पैकेट भोजन और 30 हजार पैकेट चॉकलेट गिराया। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भीषण ठंड और पथरीली जमीन को देखते हुए चॉकलेट जिंदा रहने के लिए ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम करता है। सूत्र ने कहा, 'शुरू में पानी का कोई स्रोत नहीं था और पानी की केन को हेलिकॉप्टर से गिराना पड़ा। कुलियों का काम काफी कठिन था। प्रत्येक आदमी को 10 से 15 किलो राशन ले जाना था। साथ ही उन्हें वापस नीचे आने और दूसरी यात्रा से पहले आराम करना भी जरूरी था। हमने 120 जवानों के लिए 30 दिन का राशन भेजा। प्रत्येक सैनिक को करीब डेढ़ किलो राशन की जरूरत होती है जिसमें पानी और मिट्टी का तेल शामिल है।' 

चीन और भारतीय सैनिकों की फ्लैग मीटिंग के दौरान ली गई तस्वीर

उन्होंने बताया कि दूसरी तरफ चीनी सेना को भौगोलिक लाभ है। सूत्र ने कहा, 'चीन की तरफ की मिट्टी कठोर और हमेशा जमी रहती है। हमसे उलट वे आसानी से सड़क बना सकते हैं। भारतीय क्षेत्र में मिट्टी भुरभुरी है और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। इससे जो भी सड़कें बनेंगी वे नष्ट हो जाएंगी।' उन्होंने बताया कि जिस जगह पर घुसपैठ हुई है, वहां शुक्रवार को तीन फुट बर्फ पड़ी थी। उन्होंने कहा, 'हमने अपने सैनिकों को नजदीक के नीचले इलाकों में वापस बुला लिया है।' इस जगह पर एक निश्चित समय पर ही गश्त लगाई जाती है। 

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