ऐसा क्या हुआ कि भगवान विष्णु को अपना नेत्र शिव को अर्पित करना पड़ा, पुराणों में छिपा रहस्य

ऐसा क्या हुआ कि भगवान विष्णु को अपना नेत्र शिव को अर्पित करना पड़ा, पुराणों में छिपा रहस्य

By: Sachin
December 07, 16:12
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New Delhi: लोक मान्यता है कि जब भगवान किसी को भी कोई वरदान देते हैं तो उसका जीवन सफल हो जाता है। प्रभु के आशीर्वाद से बड़ा इस संसार में और कुछ नहीं है। ग्रंथों में विख्यात ऐसी कितनी ही कथाएं हैं जिनमें भगवान की महिमा व इनके द्वारा अपने भक्तों व शिष्यों को दिए गए वरदानों का वर्णन मिलता है।

भगवान विष्णु

उन्ही कथाओं में से एक कथा है जिसमें भगवान शिव को प्रसन्न करने व उनसे वरदान मांगने के लिए भगवान विष्णु ने अपना नेत्र तक उनके समक्ष अर्पित करना पड़ा था। किंतु ऐसा क्या हुआ था कि विष्णु को अपना नेत्र ही भगवान शिव को देना पड़ा?

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भगवान विष्णु को शिवजी ने दिया था सुदर्शन चक्र

भगवान शिव ने सुदर्शन चक्र दिया था विष्णु को

ब्रह्मांड के पालनहार भगवान विष्णु को हिन्दू धर्म के तीन मुख्य ईश्वरीय रूपों में से एक रूप माना जाता है। विष्णु के हर चित्र व मूर्ति में उन्हें सुदर्शन चक्र धारण किए देखा जाता है। दरअसल, यह सुदर्शन चक्र उन्हें भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए दिया था।

भगवान विष्णु

क्यों दिया था शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र

कहा जाता है कि एक बार जब राक्षसों के अत्याचार बहुत बढ़ गए तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास आए। देवताओं की समस्या का समाधान निकालने के लिए उस समय विष्णु ने भगवान शिव से कैलाश पर्वत पर जाकर प्रार्थना की।

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विष्णुजी ने भगवान शिव को अर्पित किया था अपना नेत्र

भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भगवान विष्णु ने एक हजार नामों से शिव की स्तुति की। इस दौरान प्रत्येक नाम पर एक कमल पुष्प शिव को अर्पित किया। तब भगवान शंकर ने विष्णु की परीक्षा लेने के लिए उनके द्वारा लाए एक हजार कमल में से एक कमल का फूल छिपा दिया।

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शिव की माया से अनजान विष्णु इस बात का पता ना लगा सके और इसीलिए एक फूल कम पाकर भगवान विष्णु उसे ढूंढ़ने लगे, परंतु उन्हें फूल नहीं मिला। तब विष्णु ने एक फूल की पूर्ति के लिए अपना एक नेत्र निकालकर शिव को अर्पित कर दिया। विष्णु की भक्ति देखकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हुए और उनके समक्ष प्रकट होकर वरदान मांगने के लिए कहा। तब विष्णु ने एक ऐसे अजेय शस्त्र का वरदान मांगा जिसकी सहायता से वे देवताओं को दैत्यों के प्रकोप से मुक्त कर सकें। फलस्वरूप भगवान शंकर ने विष्णु को अपना सुदर्शन चक्र दिया।

भगवान शिव

विष्णु ने उस चक्र से दैत्यों का संहार कर दिया। इस प्रकार देवताओं को दैत्यों से मुक्ति मिली तथा सुदर्शन चक्र उनके स्वरूप से सदैव के लिए जुड़ गया।

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