सावन महीने में भगवान शिव की आराधना कैसे करें

NEW  DELHI: 6 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में सावन के महीने का बड़ा ही महत्व है. इस महीने में जो भी भक्त सोमवार का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है।पूरे महीने शिवभक्त बड़ी ही श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल यह अद्भुत संयोग है कि श्रावण मास में कुल पांच सोमवार पड़ेंगे. सावन के महीने में अद्भुत संयोग बन रहा है क्योंकि सावन की शुरूआत का पहला दिन ही सोमवार है, वहीं सावन के अंतिम दिन यानी 3 अगस्त को भी सोमवार का ही दिन है।इस महीने में मोनी पंचमी, मंगला गौरी व्रत, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली और सोमवती अमावस्या, हरियाली तीज, नागपंचमी और रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पड़ेंगे। साथ ही इस बार सावन में 11 सर्वार्थ सिद्धि, 10 सिद्धि योग, 12 अमृत योग और 3 अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं।
श्रावण मास के सोमवार का महत्व भगवान् शंकर को प्रसन्न करने और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए व्रत इत्यादि रखे जाते हैं। वैसे तो सोमवार के व्रत का अपना अलग महत्व होता है। मान्यता है कि 16 सोमवार के व्रत करने से मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है। लेकिन अगर बात सावन के सोमवार की हो तो इस व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
आइये जानते हैं इस व्रत को करने की विधि
नारद पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। अगर संभव हो तो व्रत वाले दिन शिव भगवान के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व दूध चढ़ाएं। उसके बाद व्रत रखने का संकल्प लें। दिन में सुबह और शाम भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें। इस दिन पूजा करते समय व्रत कथा जरूर सुनें क्योंकि इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। शाम को पूजा के बाद व्रत खोल लें। शास्त्रों के अनुसार सावन सोमवार व्रत में तीन पहर तक उपवास रखकर उसके बाद व्रत खोलना चाहिए। यानी कि एक समय भोजन करना चाहिए। सावन व्रत पूजा विधि: सावन के सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले तीसरे पहर में उठकर घर की सफाई और स्नान करना चाहिए। उसके बाद पूरे घर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर दें। घर के मंदिर में भगवान शंकर और मां पार्वती की मूर्ति को स्थापित करें और अगर पहले से मौजूद है तो उसे साफ कर के रखें। उसके बाद पूजा का आरंभ भगवान श्री गणेश की अराधना से करना चाहिए। फिर भगवान शिव जी, माता पार्वती व नन्दी देव की पूजा करनी चाहिए। पूजन सामग्री में दूध, दही, जल, शहद, घी, चीनी, मोली, पंचामृ्त, वस्त्र, चन्दन, जनेऊ, रोली, बेल-पत्र, चावल, आक-धतूरा, फूल, भांग, पान-सुपारी, इलायची, कमल गठ्टा, प्रसाद, लौंग, मेवा के साथ दक्षिणा चढ़ाई जाती है। इतना करने के बाद ‘मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये’ मंत्र का जाप करें। सोमवार व्रत कथा सुनें। व्रत कथा सुनने के बाद भगवान शंकर की आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।”,

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