कश्मीर में धारा 35ए पर मचा कोहराम... कश्मीर से हटते ही भारतीयों को मिल जाएंगे ये अधिकार

कश्मीर में धारा 35ए पर मचा कोहराम... कश्मीर से हटते ही भारतीयों को मिल जाएंगे ये अधिकार

By: Rohit Solanki
August 10, 16:08
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Srinagar: धारा 35ए को लेकर पूरे जम्मू कश्मीर में जैसे कोहराम मच गया है। राज्य की राजनीति गर्मा गई है। नैकां ने तो यह धमकी दे डाली है कि अगर धारा 35ए हटता है तो अमरनाथ विद्रोह से बड़ा विद्रोह होगा। 

विधानसभा को विशेषाधिकार : धारा 35ए के तहत जम्मू कश्मीर की विधानसभा को यह अधिकार दिया गया है कि वो स्थायी नागरिक की परिभाषा तय कर सकती है। हांलाकि संविधान की किताब में इस तरह के किसी भी अनुच्छेद का कोई जिक्र नहीं है। इस अनुच्छेद को 14 मई 1954 को राष्ट्रपति के कहने पर संविधान में जगह मिली थी पर संसद की कार्यवाही से लेकर संविधान सभा में इसको लेकर किसी तरह के संशोधन का कोई जिक्र नहीं है।

जानकारी के अनुसार तत्कालीन सरकार ने धारा 370 के तहत प्राप्त शक्ति का प्रयोग करके धारा 35ए को लागू किया। इसके तहत जम्मू कश्मीर की विधानसभा को विशेष दर्जा मिला है। जमू कश्मीर विधानसभा के पास अधिकार हैि कि आजादी के समय राज्य में शरणार्थियों को राज्स की स्थायी सदस्यता के अधिकार दे या न दे।

कब लगाई गई धारा : धारा 35ए को लागू करने के लिए 14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डा राजेन्द्र प्रसाद ने आदेश पारित किया और इस अनुच्छेद को संविधान के साथ जोड़ दिया गया।

बाहर के नागरिक नहीं खरीद सकते जमीन : धारा 35ए और धारा 370 के तहत जम्मू कश्मीर में बाहर नागरिक जमीन नहीं खरीद सकते हैं। इस धारा के तहत कोई भी बाहरी नागरिक जम्मू कश्मीर का नागरिक नहीं बन सकता है।

लड़कियों को भी मिले हैं अधिकार : धारा 35ए के तहतजम्मू कश्मीर की लडक़ी अगर बाहर के किसी लडक़े के साथ शादी करती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। उसके बच्चों के पास भी अधिकार नहीं रहते हैं।

हटाने की मांग : इस अनुच्छेद को हटाने की पुरजोर मांग उठ रही है। कहा जा रहा है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं किया गया था। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि विभाजन के समय बहुत से शरणार्थी पाकिस्तान से भारत आए। उनमें से बहुत सारे जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं। 35 ए के तहत अन्हें जम्मू कश्मीर की स्थायी नागरिकता नहीं मिल रही है। जम्मू कश्मीर सरकार इनके साथ भेदभाव करती है।

लोग भी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट : सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में लोगों ने शिकायत की है कि धारा 35ए के कारण संविधान से जुड़े उनके मूल अधिकार सरकार ने छीन लिए हैं। इस धारा को फौरन रद्द किया जाए।

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