26/11 के इस हीरो ने सीने पर खाई थी गोली,अब लद्दाख में 72 किमी की मैराथन जीत उड़ाए दुनिया के होश

26/11 के इस हीरो ने सीने पर खाई थी गोली,अब लद्दाख में 72 किमी की मैराथन जीत उड़ाए दुनिया के होश

By: Rohit Solanki
September 14, 12:09
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Mumbai: मुंबई आतंकी हमले में सीने पर खाने कई गोली खाने वाले बहादुर मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया ने नया इतिहास लिख दिया है। हौसले और जज्बे की मिसाल बन चुके प्रवीण ने 72 किलोमीटर लंबी लद्दाख में होने वाली खादुंग ला मैराथन में पदक जीतकर साबित कर दिया है कि अगर इंसान में जज्बा हो तो नामुमकिन लगने वाली मंजिल भी हासिल की जा सकती है।

पूर्व मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया मुंबई आतंकी हमले के दौरान आतंकियों की गोली का शिकार हो गए थे। 26 नवंबर 2008 को ताज हमले के दौरान होटल के एक कमरे में 3 आतंकी छिपे बैठे थे। जैसे ही प्रवीण कमरे में घुसे, आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। आतंकियों की एक गोली उनके सीने जबकि दूसरी गोली कान के बगल से चीरती हुई निकल गई। दो गोली लगने के बाद भी प्रवीण ने हिम्मत नहीं हारी और तीनों आतंकियों को अकेले मौत के घाट उतार दिया। उनकी इस बहादुरी के कारण उन्हें शौर्य चक्र से नवाजा जा चुका है।

नौ साल तक चले इलाज के बाद प्रवीण ठीक हो गए लेकिन कान के पास गोली लगने की वजह से उनके सुनने की क्षमता कम हो गई। नेवी में कार्यरत इस कमांडो को इसके बाद अधिकारियों ने नॉन-एक्टिव ड्यूटी दे दी थी। खुद को फिट साबित करने के लिए प्रवीण ने कई मैराथनों में हिस्सा लिया।

हाल ही में 9 सितंबर को खारदुंग ला मैराथन में हिस्सा लेते हुए प्रवीण ने तय समय में 72 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन पूरी की। पदक जीतने के बाद प्रवीण ने बताया कि गोली लगने के बाद से डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी कि मैं आगे कुछ कर पाऊंगा। उन्होंने कहा कि मैंने हार नहीं मानी और 5 महीने तक अस्पताल में मौत से लड़ता रहा। कान के पास गोली लगने की वजह से मुझे सुनने में दिक्कत होने लगी। इसके बाद जब दोबारा नेवी ज्वाइन करने गया तो रूल बुक के आधार पर मुझे नॉन-एक्टिव ड्यूटी दे दी गई। मुझे लगा कि ये मेरी सही जगह नहीं है और मुझे दोबारा देश के लिए कुछ करना है, इसलिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

प्रवीण ने बताया कि आंशिक रूप से विकलांग होने के कारण ये तो साफ था कि मैं दोबारा कमांडो नहीं बन सकता, इसलिए नेवी के पर्वतीय दल में आवेदन किया जिसे मेडिकल आधार पर ठुकरा दिया गया। मैं निराश होने लगा था कि तभी ताज होटल के कर्मचारियों ने मुझे धावक प्रवीण बाटीवाला से मिलवाया, जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया।

पूर्व मरीन कमांडो को नई राह दिखाने वाले धावक प्रवीण बाटीवाला ने कहा कि खारदुंग ला मैराथन पूरी करना प्रोफेशनल धावकों के लिए भी बेहद मुश्किल है क्योंकि समुद्र तल से 18380 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सिजन बहुत कम हो जाती है और दौड़ते-दौड़ते किसी के भी फेफड़े बेकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कमांडो प्रवीण ने अपनी इच्छाशक्ति के दम पर इस मुकाम को हासिल कर साबित कर दिया है कि जहां चाह होती है वहीं राह होती है।

 तेवतिया को यह पता था कि अब वह फिर से कमांडो नहीं बन सकते, लेकिन वह डेस्क जॉब नहीं करना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने नेवी पर्वतीय दल के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका आवेदन मेडकिल आधार पर खारिज कर दिया गया। तेवतिया ने फिर खुद को फिट साबित करने का फैसला किया। ताज होटल कर्मचारियों की मदद से वह मैराथन धावक प्रवीण बाटीवाला से मिले। बाटीवाला ने प्रवीण को लंबी दूरी की दौड़ में शामिल होने के लिए हौसला अफजाई की। बाटीवाला ने कहा, 'मैं ऐसी मजबूत इच्छाशक्ति वाले कुछ लोगों से ही मिला हूं। खारदुंग ला मैराथन पूरी करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। यहां ऑक्सिजन के लेवल काफी कम होता है और अगर किसी का फेफड़ा क्षतिग्रस्त हो तो, उसके लिए तो यह बेहद दुरूह कार्य है। प्रवीण का ऐसा करना बड़ी उपलब्धि है।'

प्रवीण अपनी इस जीत के बाद अब फुल आइरनमैन ट्राइथलॉन की तैयारी में जुट गए हैं। इसमें 3.86 किलोमीटर की तैराकी, 180.25 किमी की साइकलिंग और 42.20 किलोमीटर की दौड़ शामिल होती है। प्रवीण हाल ही में जयपुर में हुई एक ट्राइथलॉन में हिस्सा ले चुके हैं, जहां उन्होंने 1.9 किलोमीटर की तैराकी, 90 किलोमीटर साइक्लिंग और 21 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लिया। 

पूर्व मरीन कमांडो ने कहा, 'इतना सब करने के बाद भी नेवी को मेरे फिटनेस पर यकीन नहीं हुआ। मैं मैराथन के लिए ज्यादा छुट्टियां नहीं ले सकता था, इसलिए मैंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। मुझे किसी को लेकर कोई गिला नहीं है। उन्होंने (नौसेना) किताब के अनुसार काम किया और मैं एक जूनियर रैंक का अधिकारी था, लेकिन मैं चाहता था कि हर कोई यह जाने कि मैं वही आदमी हूं जिसने ताज होटल में बतौर कमांडो हिस्सा लिया था। मैं खुद को भूलने नहीं देना चाहता था।'

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