दुश्मनों को धूल चटाने आ गया महाशक्तिशाली Apache हेलीकॉप्टर, भारतीय पायलटों ने भरी पहली उड़ान

दुश्मनों को धूल चटाने आ गया महाशक्तिशाली Apache हेलीकॉप्टर, भारतीय पायलटों ने भरी पहली उड़ान

By: Rohit Solanki
August 10, 13:08
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New Delhi: भारत जल्द ही सीमा पर दुश्मनों पर अपने गोलाबारी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए अपने घातक American Apache हमलावर हेलीकॉप्टर को Pathankot एयरबेस और Assam के जोरहाट में तैनात करने की योजना बना रहा है। यह पाकिस्तान और चीन के साथ भारतीय सीमा पर वायुसेना की क्षमता को मजबूत करेगा।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, "Pathankot एयरबेस में पहले से ही रूसी मूल का MI-35K हेलीकॉप्टर का एक घटक है, जबकि Assam के जोरहाट को पहली बार इस हेलीकॉप्टर की सौगात मिल रही है। भारतीय पायलटों और वायु सेना को भी इन हेलिकॉप्टरों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। 

भारतीय वायु सेना लंबे समय तक ऐसे हेलीकाप्टरों का संचालन कर रही है, लेकिन थल सेना भी अब वायु सेना पर नियंत्रण करना चाहता है, क्योंकि इनका मानना है कि इसके पायलट जमीन पर आपरेशनों के समर्थन के लिए बेहतर अनुकूल होंगे। भारतीय सेना में Apache पहला शुद्ध हमलावर हेलीकॉप्टर होगा। गौरतलब है कि, भारतीय वायुसेना के पास जो हमलावर हेलिकॉप्टर हैं वे सेवानिवृत्ति के कगार पर हैं। 

जुड़वां इंजन वाला Apache हेलीकॉप्टर दो पायलटों द्वारा संचालित किया जाता है, जो अपने डोनट आकार के लोंग्बो रडार के साथ 256 लक्ष्य का पता लगाने और उन्हें एक साथ करने में सक्षम है। अगले दो सालों में इन हेलिकॉप्टरों को चिनूक-64 डी भारी लिफ्ट हेलीकाप्टरों के साथ भारतीय वायुसेना तक पहुंचाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल लद्दाख जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के इस्तेमाल के लिए किया जाएगा। 

बता दें कि, भारत ने रूसी और American फर्मों से लगभग आठ वर्ष की निविदा प्रक्रिया के बाद एक साथ Apache और चिनूक हेलीकाप्टर के लिए सौदों पर हस्ताक्षर किए थे। चिनूक हेलिकॉप्टरों की चंडीगढ़ एयरबेस पर तैनात किये जाने की योजना है।  हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के द्वारा बड़ी संख्या में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) बनाए जाने की योजना है, जिसे सेना और IAF द्वारा दोनों पश्चिमी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। एचएएल ने एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर (ध्रुव) का एक हथियार संस्करण भी विकसित किया है, जिसे रुद्र कहा जाता है। इसे पूर्वोत्तर में लिकाबाली और पाकिस्तान के पास भटिंडा जैसी ठिकानों के बिना तैनात किया जा रहा है।

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