एक बहादुर आदिवासी नेता जिन्होंने अंग्रेजों को दी थी जबरदस्त चुनौती, जयंती पर PM मोदी ने किया नमन

एक बहादुर आदिवासी नेता जिन्होंने अंग्रेजों को दी थी जबरदस्त चुनौती, जयंती पर PM मोदी ने किया नमन

By: Madhu Sagar
November 15, 14:11
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New Delhi: बिरसा मंडा एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ एक आदिवासी नेता भी थे। आज उनकी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम रघुवर दास ने उन्हें नमन किया है। 

सीएम ने कोकर स्थित बिरसा मुंडा की समाधि पर माल्यार्पण किया। इसके बाद रघुवर दास ने बिरसा चौक रेलवे ओवर ब्रीज का उद्घाटन किया। वहीं, रांची के बिरसा चौक पर राष्ट्रपति ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। 


बिरसा मुंडा की बात करें तो वो एक आदिवासी नेता थे। जिन्हें भारत में रांची और सिंहभूमि के लोग बिरसा भगवान के नाम से याद करते हैय़ 19वीं सदी में बिरसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक अहम कड़ी साबित हुए थे।

बता दें बीरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 को रांची में हुआ था। कुछ समय बाद बिरसा मुंडा ने जर्मन स्कूल में शिक्षा लेने के लिए ईसाई धर्म को स्वीकार किया था। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था।

जन-सामान्य का बिरसा में काफ़ी दृढ़ विश्वास हो चुका था, इससे बिरसा को अपने प्रभाव में वृद्धि करने में मदद मिली। लोग उनकी बातें सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग आने लगे। बिरसा की बातों का प्रभाव यह पड़ा कि ईसाई धर्म स्वीकार करने वालों की संख्या तेजी से घटने लगी और जो मुंडा ईसाई बन गये थे, वे फिर से अपने पुराने धर्म में लौटने लगे।

ब्रिटिश सरकार ने उन्हें लोगों की भीड़ जमा करने से रोका। बिरसा का कहना था कि मैं तो अपनी जाति को अपना धर्म सिखा रहा हूँ। इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की लेकिन लेकिन गांव वालों ने उन्हें छुड़ा लिया। लेकिन 3 मार्च में बीरसा मुंडा को ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय वो अपनी आदिवासी गुरैला आर्मी के साथ जमकोपाई जंगल में सो रहे थे। वहां अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया था। जिस कारण वे 9 जून 1900 को शहीद हो गए। बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तों में की जाती है । 
 

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