जब उप मुख्यमंत्री रहते हुए कर्पूरी ठाकुर रिक्शा से गये थे सर्किट हाउस

जब उप मुख्यमंत्री रहते हुए कर्पूरी ठाकुर रिक्शा से गये थे सर्किट हाउस

By: Rohit Solanki
January 13, 22:01
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New Delhi: समय- समय की बात है। पहले मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री सहज भाव से आम जनता के बीच जाते थे।

जरूरत न हो ते लाव-लश्कर भी अपने साथ नहीं रखते थे। जब कि आज के दौर में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री कारों के काफिला के साथ चलते हैं। लेकिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जब डिप्टी सीएम थे तब एक बार रिक्शा से ही सर्किट हाउस पहुंच गये थे।

1967 में पहली बार बिहार में गैरकांग्रेस दलों की मिलीजुली सरकार बनी थी। महामाया प्रसाद सिन्हा मुख्यमंत्री बने थे और कर्पूरी ठाकुर डिप्टी सीएम बने थे। कर्पूरी ठाकुर के निजी सचिव रहे लक्ष्मी साहू ने एक दिलचस्प घटना के बारे में लिखा है। उप मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को सरकारी काम के सिलसिले में एक बार सहरसा जाना था। कुछ अफसरों के साथ लक्ष्मी साहू भी उनके साथ थे। बरौनी से सभी लोग ट्रेन के जरिये खगड़िया पहुंचे। खगड़िया पहुंचने में कुछ देर हो गयी इस लिए वहां से सहरसा जाने वाली कनेक्टिंग ट्रेन छूट गयी। उप मुख्यमंत्री रहते हुए भी कर्पूरी ठाकुर स्टेशन की बेंच पर ही बैठ गये। अफसरों को वहीं फाइल लाने के कहा। बेंच पर ही बैठ कर फाइलों का मुआयना करने लगे। इसी बीच पता चला कि रेलवे के एक अफसर खगड़िया आये हुए हैं। उनकी सवारी के लिए एक मोटर चालित ट्रॉली थी। लक्ष्मी साहू ने उस रेलवे अफसर से अनुरोध किया कि वे बिहार के डिप्टी सीएम को सहरसा पहुंचाने में मदद करें । तब तक कर्पूरी ठाकुर खुद उस अफसर के पास पहुंच गये। अफसर ने बहुत उत्साह के साथ कर्पूरी ठाकुर को सहरसा पहुंचा दिया। वे ट्रेन से पहले ही सहरसा पहुंच गये इस लिए उनकी आगवानी के लिए कोई अफसर वहां मौजूद नहीं था। कर्पूरी ठाकुर और अन्य लोग रिक्शा पर सवार हो कर सहरसा के सर्किट हाउस पहुंचे।

स्थानीय अफसरों को जब उप मुख्यमंत्री के सहरसा पहुंचने की जानकारी मिली तो वे गिरते –पड़ते सर्किट हाउस पहुंचने लगे। कर्पूरी ठाकुर ने किसी को कुछ नहीं कहा बल्कि समय से पहले पहुंचने की कहानी सुनाने लगे। उप मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर उस रेलवे अधिकारी के व्यवहार से बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को चिट्ठी लिख कर उनकी कार्यकुशलता और दक्षता की बहुत प्रशंसा की थी। इतने बड़े पद पर रहते हुए भी कर्पूरी ठाकुर ने कोई दिखावा नहीं किया। ट्रेन की सवारी की। ट्रॉली की सवारी की। और तो और रिक्शा पर चढ़ने में भी कोई गुरेज नहीं किया।

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