डोनाल्ड ट्रंप का ऐतिहासिक फैसला, यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर दी मान्यता

डोनाल्ड ट्रंप का ऐतिहासिक फैसला, यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर दी मान्यता

By: Naina Srivastava
December 07, 08:12
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New Delhi: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Jerusalem को Israeli की राजधानी के तौर पर मान्यता दे दी है। बता दें कि ट्रंप ने 2016 में अपने चुनाव अभियान के दौरान यरुशलम को इस्राइल की राजधानी बनाने का वादा किया था। 

बता दें कि ट्रंप के इस ऐलान से अरब देशों विरोध किया है। अरब नेताओं ने चेताया कि इस फैसले से पश्चिम एशिया और दूसरी जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। 

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डोनाल्ड ट्रंप ने दशकों पुरानी अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय नीति को तोड़कर ये फैसला लिया है। इस कदम से जहां इजरायल खुश है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता है। 

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ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देती है। अमेरिका  इसे ऐतिहासिक वास्तविकता को पहचान देने के तौर पर देखता है। डॉनल्ड ट्रंप इस फैसले को शांति के लिए उठाया गया कदम बताया है जो सालों से रुका हुआ था। वाइट हाउस में संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, 'अब समय आ गया है कि यरुशलम को इजरायल की राजधानी बनाया जाए।' उन्होंने कहा कि फलस्तीन से विवाद के बावजूद यरुशलम पर इजरायल का अधिकार है। 'यह वास्तविकता के अलावा और कुछ नहीं है।' 

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ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियो ने कहा कि यरुशलम प्राचीन काल से यहूदी लोगों की राजधानी रहा है और आज की वास्तविकता यह है कि यह शहर सरकार, महत्वपूर्ण मंत्रालयों, इसकी विधायिका, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र है।' एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कदम उठाने के साथ ट्रंप ने अपना एक प्रमुख चुनावी वादा पूरा किया है। पूर्व में राष्ट्रपति चुनाव के कई उम्मीदवार यह वादा कर चुके हैं।

दरअसल, इजरायल पूरे यरुशलम शहर को अपनी राजधानी बताता है। जबकि फलस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपनी भावी राजधानी बताते हैं। असल में इस इलाके को इजरायल ने 1967 में अपने कब्जे में ले लिया था। इजरायल-फलस्तीन विवाद की जड़ यह इलाका ही है। इस इलाके में यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के पवित्र स्थल हैं। यहां स्थित टेंपल माउंट जहां यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है, वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान बेहद पाक मानते हैं। मुस्लिमों की मान्यता है कि अल-अक्सा मस्जिद ही वह जगह है जहां से पैगंबर मोहम्मद जन्नत पहुंचे थे। इसके अलावा कुछ ईसाइयों की मान्यता है कि यरुशलम में ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। यहां स्थित सपुखर चर्च को ईसाई बहुत ही पवित्र मानते हैं। 

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