एक मंच पर मुलायम-अखिलेश की मौजूदगी में दिखा शांत होता सपा घमासान

एक मंच पर मुलायम-अखिलेश की मौजूदगी में दिखा शांत होता सपा घमासान

By: Sachin
October 12, 22:10
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New Delhi: लगभग सात माह बाद गुरुवार को किसी सार्वजनिक मंच पर एक साथ आए मुलायम सिंह व अखिलेश यादव को देख कर लगा कि कुनबे की कलह शांत हो रही है। मुलायम ने फिर साबित किया कि वह अखिलेश के साथ खुलकर हैं। लोहिया पार्क में डा. राममनोहर लोहिया को श्रद्धांजलि अर्पित करने के अवसर पर पिता-पुत्र मुस्कारते हुए मीडिया से भी मुखातिब हुए। इस दृश्य से यह भी साफ हुआ कि अब सपा में शिवपाल यादव की भूमिका सीमित होगी।

सुबह दस बजे आयोजित कार्यक्रम में माहौल खुशनुमा था। पिता-पुत्र मिलन से सपाइयों के चेहरे खिले थे तो अखिलेश-मुलायम में आत्मीयता झलक रही थी। अखिलेश ने पिता के चरण छू कर आशीर्वाद लिया तो मुलायम भी मुस्कुराए। यह नजारा गत जनवरी में सपा दफ्तर में कार्यकर्ताओं की बैठक से उलट था। तब पिता-पुत्र के बीच टकराव जैसे हालात थे और बैठक में तीखी बहस के वीडियो वाइरल हुए थे। 19 मार्च को हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथग्रहण समारोह में दोनों एक साथ तो दिखे लेकिन रिश्तों की तल्खी भी साफ थी। 

गुरुवार को पिता-पुत्र ने एक साथ फोटो खिंचवाए और मीडिया के प्रश्नों के जवाब भी दिए। मुलायम ने परिवार में मतभेद न होने की बात दोहरायी। अखिलेश को आशीर्वाद देने के सवाल पर कहा, ' अखिलेश के साथ पूरा आशीर्वाद है, रोज-रोज आशीर्वाद थोड़े ही दिया जाता है।' अखिलेश का लहजा भी बदला हुआ था। पिता के प्रति आदर जताने का उन्होंने कोई मौका नहीं गंवाया।

कहा,'पिता बेटे की गलती छुपाता है तो बेटा राह भटक जाता है। नेताजी (मुलायम सिंह) ने मेरी गलती को सामने रखा। हर परिवार में विचारों का झगड़ा होता है। हम इससे जुदा नहीं है, या फिर कह लीजिए कि अकेले हम नहीं हैं। नेता जी ने आशीर्वाद दिया है। एक पखवाड़े के भीतर यह फिर सिद्ध हुआ कि मुलायम अपने पुत्र अखिलेश के साथ हैं। शिवपाल यादव इस मौके पर मौजूद नहीं थे। हालांकि लोहिया पार्क आने से पहले मुलायम सिंह लोहिया ट्रस्ट भी गए। वहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम शिवपाल समर्थकों ने आयोजित किया था। मुलायम प्रात: साढ़े नौ बजे वहां पहुंचे थे। इसके बाद वह तो लोहिया पार्क के लिए चले गए लेकिन शिवपाल वहीं बैठे रह गए। 

अखिलेश ने सपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उनका कहना था कि चुनाव में उतरना है तो प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम एक लाख वोट जुटाने होंगे। इसके लिए चाहे कुछ भी क्यों न करना पड़े? उनकी तरह से (भाजपा) झूठ का सहारा भी ले सकते है। पत्रकारों से अखिलेश ने फैजाबाद में उनके शिलापट हटाने के सवाल पर कहा कि अगर वे हमारे पत्थर हटाएंगे तो हम उनकी सरकार हटा देंगे। संकल्प बस सेवा चलाने के सवाल पर कहा कि इन लोगों ने हमारे समय की बसों का रंग बदल कर चला दिया है। सरयू नदी के तट पर भगवान राम की विशाल मूर्ति लगाने के प्रश्न पर कहा कि उनकी सरकार आएगी तो इससे भी बड़ी मूर्ति लगवा देगी। अयोध्या में दीपावली मनाने पर उनका कहना था कि यह नया चलन है परंतु इस बार महंगाई इस कदर है कि बच्चे एक पटाखा भी नहीं चला पाएंगे।

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