ज़िम्बॉब्वे में तख्तापलट! राष्ट्रपति मुगाबे सेना की हिरासत में, सरकारी चैनल और Airport पर भी सेना का कब्जा

ज़िम्बॉब्वे में तख्तापलट! राष्ट्रपति मुगाबे सेना की हिरासत में, सरकारी चैनल और Airport पर भी सेना का कब्जा

By: shailendra shukla
November 15, 16:11
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Harare ( Zimbabwe): सउदी अरब की तर्ज पर एक बार फिर से एक देश की तख्तापलट की साजिश हो रही है। यह देश है जिम्बांब्वे! सेनाप्रमुख जनरल कोन्सटंटिनो चिवेंगा देश के उपराष्ट्रपति को बर्खास्त किए जाने के बाद राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को चुनैती दी थी।

ज़िम्बाब्वे में सत्तारूढ़ पार्टी ने ट्विटर पर दावा किया है कि एक रक्तहीन सत्ता परिवर्तन के बाद राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को हिरासत में ले लिया गया है। इससे पहले सेना प्रमुख ने स्पष्ट कहा था कि सेना मुगाबे की पार्टी में जारी उठापटक को खत्म करने के लिए कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि सेना ने देश के वित्तमंत्री के साथ-साथ राष्ट्रपति मुगाबे के कई शीर्ष सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया है। इससे यह माना जा रहा है कि जल्द ही जिम्बॉबे में सेना तख्तापलट की घोषणा कर सकती है। 

हालांकि सेनाप्रमुख ने यह भी कहा था कि ये 'सरकार का सैनिक तख़्तापलट' नहीं है और राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे सुरक्षित हैं। जो अभी छल-कपट में शामिल हैं उन्हें हम याद दिलाना चाहते हैं कि जब देश की बात आएगी तो सेना कड़ा कदम उठाने में कतई नहीं चूकेगी”

दरअसल, मुगाबे ने उपराष्ट्रपति के पद से जिस व्यक्ति को हटाया है वो 1970 के दशक में देश की स्वतंत्रता की लड़ाई के जाने-माने चेहरा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि जनरल चिवेंगा की टिप्पणी राष्ट्रीय शांति को अस्थिर करने और बग़ावत को हवा देने के लिए है।

उत्तराधिकारी की कलह


मुकाबे की पार्ट्री ने एक बयान जारी करके कहा कि वह सैन्य धमकियों के सामने वो झुकेगी नहीं और राजनीति हमेशा बंदूक के ऊपर रहेगी। गौरतलब है कि मुगाबे ने पिछले हफ़्ते उपराष्ट्रपति को उत्तराधिकार की कलह को लेकर बर्खास्त कर दिया था।


सेना का सरकारी चैनल और एयरपोर्ट पर कब्जा


एक तरफ सेना तख्तापलट के प्रयास में जुटी हुई है तो दूसरी तरफ उसने सरकारी चैनल पर कब्जा कर लिया है। सेना ने बुधवार को सरकारी चैनल के माध्यम से जारी किए गए बयान में कहा कि वह 'अपराधियों को निशाना' बना रही है। यह बयान सेना ने उस घटना पर जारी किया है जिसमें राष्ट्रपति निवास के समीम गोलीबारी की गई थी। साथ ही सेना ने कहा है कि राष्ट्रपति और उनके परिवार को कोई खतरा नहीं है। उनकी सुरक्षा की गारंटी हमारी है।


सेना ने देश के मुख्य हरारे Airport पर भी कब्जा कर लिया है। इस Airport का नाम अभी बीते सप्ताह ही बदलकर रॉबर्ट मुगाबे इंटरनेशनल हवाई अड्डा किया गया था। 


वित्त मंत्री को सेना ने गिरफ्तार किया


सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि मुगाबे के कुछ करीबियों के साथ-साथ देश के वित्त मंत्री को भी सेना ने गिरफ्तार कर लिया है।

दूसरी तरफ दक्षिण अफ़्रीका में ज़िम्बॉब्वे के राजदूत ने देश में सत्ता परिवर्तन की ख़बरों को खारिज कर दिया था। आपको बता दें कि ज़िम्बॉब्वे में ये हालात तब पैदा हुए जब देश की सत्ताधारी पार्टी ने देश के सैन्य प्रमुख पर विश्वासघाती बर्ताव का आरोप लगाया है।

राष्ट्रपति मुकाबे पत्नी को उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे

राष्ट्रपति रॉबर्ट मुकाबे अपनी पत्नी को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं और इसलिए ही उन्होंने उपराष्ट्रपति Emmerson Mnangagwa को उनके पद से हटा दिया। क्योंकि Emmerson Mnangagwa ही देश के अगले राष्ट्रपति बनने की दौड़ में सबसे आगे थे। इतना ही नहीं हटाए गए उपराष्ट्रपति 1970 के दशक में देश की स्वतंत्रता की लड़ाई के जाने-माने चेहरा रहे हैं। 

ग्रेसी राष्ट्रपति मुकाबे की दूसरी पत्नी हैं। वह पहले जिम्बांब्वे एयरफोर्स में कार्यरत एक पायलट की पत्नी थीं। वह मुकाबे की पहले सेक्रेटरी थीं। जब जनवरी 1992 में मुकाबे की पहली पत्नी Sarah Francesca का देहांत हो गया तब उन्होंने ग्रेसी से शादी कर ली। ग्रे


सत्ताधारी पार्टी ज़ानु-पीएफ़ के युवा मोर्चा के नेता कुदज़ी चिपांगा ने सेना के द्वारा तख्तापलट की साजिश की खबरों पर कहा, "अगर चुनी हुई सरकार ख़तरे में आएगी तो हम हाथ पर हाथ रखकर बैठेंगे नहीं।'' पार्टी का युवा मोर्चा मुगाबे के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी पत्नी ग्रेसी को देख रहा है।"
 

टर्की में भी हो चुका है ऐसा

जिस तरह से इस समय जिम्बॉब्वे में सेना तख्तापलट का प्रयास कर रही है कुछ इसी तरह टर्की में भी सेना ने करने की कोशिश की थी।  15 जुलाई 2016 को रातों-रात सैनिकों के एक बड़े समूह ने तख्तापलट करने की कोशिश में कई जगह टैंक उतार दिए थे। कुछ जगहों पर हुई गोलीबारी में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 1000 से भी ज्यादा लोग घायल हुए थे।


बाद में लगभग 3000 सैनिकों ने सरेंडर कर दिया था। इस कार्य के लिए कुछ लोगों ने सेना का समर्थन किया था और कुछ ने विरोध भी किया। टर्की की मीडिया के मुताबिक देश के 2700 से अधिक जजों को उनके पद से हटा भी दिया गया था। उनपर भी तख्तापलट करने की साजिश का आरोप लगाया गया था। सेना ने वर्ष 1960 के बाद से तुर्की में तीन बार तख्तापलट की कोशिश की और वर्ष 1997 में इस्लामी सरकार को बेदखल कर दिया था।


सऊदी में तख्तापलट

जिस तरह इन दिनों जिम्बॉब्वे में चल रहा है यानि राष्ट्रपति मुगाबे अपनी पत्नी ग्रेसी को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाह रहे हैं ठीक ऐसा ही कुछ सऊदी में चल रहा था। जब सऊदी अरब के अगले बादशाह बनने वाले मोहम्मद बिन नएफ ने ऐसा सच बताया है जिसे सुनकर पूरी दुनिया के रौंगटें खड़े हो गए। उन्होंने बताया था कि उन्हें जून मे एक रात मक्का स्थित महल में बुलाया गया था और उन्हें वहां पर बंधक बना लिया गया था। उसके बाद उन्हें सत्ता छोड़ने के लिए कहा गया।

नएफ ने बताया था कि उन्होंने अपनी हार उसी रात मान ली थी और अगली सुबह अरब के क्राउन प्रिंस के रूप मे मोहम्मद बिन सलमान के नाम की घोषणा हो गई। मोहम्मद बिल सलमान सऊदी के मौजूदा बादशाह किंग सलमान के बेटे हैं और नएफ उनके चाचा है। यानि चाचा की गद्दी भतीजे ने हथिया ली। 

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