मुंबई 2013 नलिनी मर्डर केस: पहली बार कोर्ट में मूक-बधिरों की भाषा में हुई सुनवाई,पूछे गए 200 सवाल

मुंबई 2013 नलिनी मर्डर केस: पहली बार कोर्ट में मूक-बधिरों की भाषा में हुई सुनवाई,पूछे गए 200 सवाल

By: Naina Srivastava
October 11, 12:10
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New Delhi: ऐसा पहली बार हुआ है जब कोर्ट में मुक-बधिर से सवाल जवाब के लिए सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया गया हो। जी हां- मुंबई हाईकोर्ट ने मुंबई 2013 नलिनि मर्डर केस के मुक-बधिर आरोपियों का पक्ष जानने के लिए उनकी ही भाषा में सुनवाई की। इस सुनवाई को काफी अहम माना गया।

कोर्ट में मुक-बधिर आरोपियों का पक्ष रखने के लिए उनके परिजनों को बुलाया गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब आरोपियों से पूछे गए सवालों के जवाब आरोपी के मां-बाप ने दिया हो। लेकिन जो अब तक नहीं हुआ वो नलिनी मर्डर केस में देखने को मिला। मूक बधिर की सांकेतिक भाषा को जज तक पहुंचाने के लिए दानों के माता पिता कोर्ट में मौजूद थे। हत्या के मामले में आरोपी सैफरजा भावनगरी और परवेज खान दोनों ही मुक-बधिर हैं। दोनों के अभिभावकों ने कोर्ट में जज के सामने अपने बच्चों का पक्ष रखा।

मिली जानकारी के मुताबिक, 90 मिनट की इस सुनवाई में दोनों आरोपियों से 200 सवाल पूछे गए,इन सवालों के जवाब दोनों की परिजनों ने दिए।गौरतलब है कि नलिनि की हत्या बांद्रा वेस्ट के मधुबन बिल्डिंग के दसवें फ्लोर पर इन दोनों आरोपियों ने की थी। हालांकि इस घटना के कुछ दिनों के बाद ही  दोनों आरोपियों को अरेस्ट कर लिया गया था।

साल 2013 में मुंबई में एक महिला की हत्या के आरोप में दोनों मुक बधिर आरोपियों पर CRPC अंडर सेक्शन 313 के तहत मुकदमा चल रहा है। मूक-बधिर होने के कारण आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए उनके माता-पिता को बुलाया गया। अभिभावकों ने उनकी सांकेतिक भाषा को समझ कर अदालत और कोर्ट के सामने रखा। उनके जवाब को पुलिस रेकॉर्ड में दर्ज किया गया है। आरोपियों की कोर्ट में यह दूसरी पेशी थी जब जज ने उनके अंतिम बयान को दर्ज किया। यह मामला पिछले साढ़े चार साल से मुंबई हाई कोर्ट में चल रहा है।    

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